
Ahemdabad Airport: अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बुधवार रात एक ऐसी घटना सामने आई जिसने कुछ समय के लिए हवाई संचालन से जुड़े अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी। एयर इंडिया और इंडिगो के दो यात्री विमान एक ही टैक्सीवे पर आमने-सामने आ गए। हालांकि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की त्वरित कार्रवाई के चलते किसी भी तरह का हादसा नहीं हुआ और दोनों विमानों को सुरक्षित तरीके से संभाल लिया गया।
जानकारी के अनुसार, यह घटना रात करीब 8 बजे हुई। एयर इंडिया की उड़ान AI2493 मुंबई से अहमदाबाद पहुंची थी और लैंडिंग के बाद उसे निर्धारित पार्किंग बे की ओर जाने के निर्देश दिए गए थे। इसी दौरान विमान टैक्सी करते समय निर्धारित मार्ग से भटक गया और गलत मोड़ ले बैठा।
गलत दिशा में मुड़ने के कारण एयर इंडिया का विमान उस टैक्सीवे पर पहुंच गया जहां मुंबई के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहा इंडिगो का विमान मौजूद था। कुछ ही क्षणों में दोनों विमान एक-दूसरे के सामने आ गए, जिससे संभावित खतरे की स्थिति बन गई।
स्थिति का पता चलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तुरंत हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने इंडिगो के विमान को वहीं रोकने के निर्देश दिए और उसे आगे बढ़ने से मना कर दिया। इसके बाद एयर इंडिया के विमान को पीछे हटाकर सही दिशा में ले जाया गया और उसे उसके निर्धारित पार्किंग स्थान तक पहुंचाया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, पूरी घटना के दौरान दोनों विमानों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखी गई थी। इसी वजह से टक्कर जैसी कोई स्थिति नहीं बनी और यात्रियों तथा चालक दल की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं आया।
एयर इंडिया ने भी घटना की पुष्टि करते हुए माना कि टैक्सींग के दौरान विमान ने गलत मोड़ लिया था। हालांकि एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया और किसी भी समय यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित नहीं हुई।
हवाई अड्डों पर विमान की आवाजाही एक बेहद जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें रनवे, टैक्सीवे और पार्किंग बे के बीच सटीक समन्वय की आवश्यकता होती है। ऐसे में एयर ट्रैफिक कंट्रोल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अहमदाबाद एयरपोर्ट की यह घटना भी इसी बात का उदाहरण है कि समय पर लिए गए फैसले किसी संभावित बड़े हादसे को टाल सकते हैं।
फिलहाल घटना के कारणों और टैक्सींग के दौरान हुई चूक की समीक्षा की जा रही है। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से भविष्य में संचालन प्रक्रियाओं को और मजबूत बनाने में मदद मिलती है, ताकि हवाई सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखा जा सके।



