ECINET Software Controversy: ECINET सॉफ्टवेयर विवाद! कांग्रेस ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल, जयराम रमेश बोले- जानकारी क्यों छिपाई जा रही?

जयराम रमेश ने ECINET सॉफ्टवेयर के नाम, संस्करण और SIR में AI के कथित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। चुनाव आयोग ने RTI जवाब में व्यावसायिक गोपनीयता का हवाला दिया।

ECINET Software Controversy: चुनाव आयोग के ECINET सॉफ्टवेयर को लेकर कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर के नाम और संस्करण की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है। पार्टी का दावा है कि तकनीकी व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सामने आने पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं की जांच में मदद मिल सकती है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग दोहराई है।

हालांकि, मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर होने का आरोप कांग्रेस ने लगाया है। इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सॉफ्टवेयर के नाम और संस्करण की जानकारी देने से इनकार करते हुए व्यावसायिक गोपनीयता और बौद्धिक संपदा से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया है।

ECINET सॉफ्टवेयर को लेकर क्या है विवाद?

विवाद की मुख्य वजह SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियों और विसंगतियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना के करीमनगर के सामाजिक कार्यकर्ता एमए मुजीब अय्यूब ने RTI आवेदन के जरिए यह जानने की कोशिश की थी कि मतदाता सूची में त्रुटियों और असामान्य प्रविष्टियों की पहचान के लिए किस सॉफ्टवेयर या तकनीकी प्रणाली का इस्तेमाल किया गया।

आवेदक ने यह भी पूछा था कि क्या मतदाता रिकॉर्ड की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग या प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, किसी रिकॉर्ड को संदिग्ध चिह्नित किए जाने के बाद अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और गलत पहचान से बचाव के उपायों के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने 16 अक्टूबर को दिए गए जवाब में सॉफ्टवेयर का नाम और संस्करण बताने से इनकार किया। आयोग ने इसके लिए RTI अधिनियम की धारा 8(1)(d) के तहत व्यावसायिक गोपनीयता, व्यापार रहस्य और बौद्धिक संपदा से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया।

आयोग ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया। साथ ही, उसने स्पष्ट किया कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता को सूची में शामिल करने या बाहर करने का निर्णय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर लेते हैं।

जयराम रमेश ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ECINET से संबंधित जानकारी लगातार सार्वजनिक नहीं कर रहा है।

रमेश ने सवाल किया कि भारतीय नागरिकों को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़ी जानकारी के माध्यम से यह क्यों पता चला कि कंपनी ने ECINET सॉफ्टवेयर विकसित किया है। उन्होंने पूछा कि चुनाव आयोग ने इस संबंध में पारदर्शी तरीके से जानकारी क्यों नहीं दी।

कांग्रेस नेता ने SIR और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में AI के कथित इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मतदाता रिकॉर्ड की जांच में किन तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है और संभावित गलतियों से बचने के लिए क्या सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं।

जयराम रमेश ने दावा किया कि सॉफ्टवेयर और चुनाव आयोग के आईटी विभाग से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी आपत्तियां उठाई थीं। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों का मामला प्रधानमंत्री के अधीन आने वाले कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तक पहुंचा था।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग फिर दोहराई है। पार्टी का आरोप है कि ECINET और SIR से जुड़े सवालों पर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं होने से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जयराम रमेश ने SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग भी की। कांग्रेस का कहना है कि जब तक तकनीकी व्यवस्था, मतदाता रिकॉर्ड की जांच और कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तब तक प्रक्रिया पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

पार्टी ने SIR को लेकर अपनी आलोचना जारी रखते हुए दावा किया है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां व्यापक स्तर पर हुई हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच या ठोस प्रमाणों को अलग से देखना जरूरी है।

ECINET क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?

ECINET चुनाव आयोग का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं, उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों को चुनाव से संबंधित सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है। इसमें मतदाता पंजीकरण, आवेदन की स्थिति जानने, मतदाता सूची में नाम खोजने और चुनाव संबंधी दूसरी सेवाओं जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

चुनाव आयोग ने जनवरी 2026 में ECINET प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था। आयोग के मुताबिक, इसे चुनाव प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न डिजिटल सेवाओं को एकीकृत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

मौजूदा विवाद में मुख्य सवाल ECINET प्लेटफॉर्म के अस्तित्व को लेकर नहीं, बल्कि SIR के दौरान मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर, उसकी तकनीकी प्रक्रिया और AI के संभावित इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी को लेकर है।

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पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर बहस

ECINET विवाद ने चुनावी प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल और जवाबदेही को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। कांग्रेस चाहती है कि चुनाव आयोग सॉफ्टवेयर और AI के इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जानकारी दे। वहीं, आयोग ने RTI के जवाब में कुछ तकनीकी विवरणों को व्यावसायिक गोपनीयता से संबंधित बताते हुए सार्वजनिक करने से इनकार किया है।

मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली तकनीक, संभावित विसंगतियों की जांच और अंतिम निर्णय लेने वाले अधिकारियों की भूमिका को लेकर स्पष्टता महत्वपूर्ण है।

फिलहाल, कांग्रेस ने अपने आरोपों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग दोहराई है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के RTI जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि मतदाता को सूची में शामिल करने या हटाने का निर्णय संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी का वैधानिक दायित्व है। अब इस विवाद में आगे की चर्चा इस बात पर केंद्रित रहने की संभावना है कि तकनीकी पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।

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