
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश के एटा जिले की मारहरा विधानसभा सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत दर्ज की है। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार विधायक बने, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों ने इस सीट के राजनीतिक समीकरण को फिर चर्चा में ला दिया। उस चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच वोटों का अंतर काफी कम हो गया था।
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सपा को 17 हजार से अधिक वोटों से हराया था। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में मारहरा विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी और सपा के बीच अंतर करीब 3 हजार वोटों का रह गया। इन आंकड़ों के आधार पर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों की रणनीति और मतदाताओं के रुझान पर नजर रखी जा रही है।
2022 में बीजेपी को मिली थी बड़ी बढ़त
मारहरा विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में बीजेपी ने वीरेन्द्र लोधी को मैदान में उतारा था, जबकि सपा ने पूर्व विधायक अमित गौरव यादव पर भरोसा जताया था। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से योगेश कुमार और कांग्रेस की ओर से तारा राजपूत चुनाव लड़े थे।
चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने 1,01,387 वोट हासिल किए। सपा को 83,778 वोट मिले, जबकि बसपा के खाते में 16,900 वोट आए। कांग्रेस को 852 वोट मिले थे।
2022 के चुनाव में किसे कितने वोट मिले?
| पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|
| बीजेपी | 1,01,387 |
| सपा | 83,778 |
| बसपा | 16,900 |
| कांग्रेस | 852 |
इन नतीजों में बीजेपी ने सपा पर 17,609 वोटों की बढ़त बनाई थी। बसपा को भी लगभग 17 हजार मत मिले थे, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन सीमित रहा।
2012 में लौटी थी मारहरा सीट, 2017 से बीजेपी का दबदबा
मारहरा विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 1967 के बाद यह सीट 2012 में फिर अस्तित्व में आई थी। उस चुनाव में सपा के अमित गौरव यादव विधायक चुने गए थे।
इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की और 2022 में भी पार्टी अपनी सीट बचाने में सफल रही। इन दोनों चुनावों में वीरेन्द्र लोधी की जीत ने मारहरा में बीजेपी की स्थिति को मजबूत किया।
हालांकि, विधानसभा चुनावों के नतीजों और लोकसभा चुनाव के दौरान किसी विधानसभा क्षेत्र में मिले वोटों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि दोनों चुनावों का संदर्भ और उम्मीदवार अलग हो सकते हैं।
2024 में क्यों घट गया बीजेपी और सपा के बीच अंतर?
2024 के लोकसभा चुनाव में एटा सीट पर बीजेपी और सपा के उम्मीदवार अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से थे। बीजेपी ने लोधी समाज से जुड़े उम्मीदवार को टिकट दिया, जबकि सपा ने शाक्य समाज के प्रत्याशी को मैदान में उतारा था।
मारहरा विधानसभा क्षेत्र के परिणामों में बीजेपी को 93,724 वोट मिले, जबकि सपा को 90,889 मत प्राप्त हुए। बसपा के खाते में 13,139 वोट आए। इस तरह बीजेपी और सपा के बीच अंतर घटकर 2,835 वोट रह गया।
2024 लोकसभा चुनाव में मारहरा का परिणाम
| पार्टी | प्राप्त वोट |
|---|---|
| बीजेपी | 93,724 |
| सपा | 90,889 |
| बसपा | 13,139 |
2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 2024 में बीजेपी के वोट कम हुए और सपा के वोट बढ़े। हालांकि, दोनों चुनावों के बीच सीधी तुलना करते समय उम्मीदवारों, चुनाव के प्रकार और स्थानीय मुद्दों में अंतर को भी ध्यान में रखना चाहिए।
शाक्य मतदाताओं की भूमिका पर क्यों हो रही चर्चा?
मारहरा में लोधी और यादव समाज के मतदाताओं की संख्या महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा शाक्य, ठाकुर, निषाद और अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाता भी चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के शाक्य उम्मीदवार होने के कारण इस समाज के मतदाताओं का समर्थन चर्चा का विषय बना। उपलब्ध राजनीतिक आकलन के मुताबिक, सपा को यादव और मुस्लिम मतदाताओं के साथ शाक्य समाज के एक हिस्से का भी समर्थन मिला। वहीं बीजेपी को लोधी समाज और सामान्य वर्ग के मतदाताओं के बीच समर्थन प्राप्त हुआ।
हालांकि, जाति के आधार पर मतदाताओं के व्यवहार को पूरी तरह एक जैसा मानना उचित नहीं है। किसी समुदाय के सभी मतदाता एक ही पार्टी को वोट दें, यह जरूरी नहीं होता। उम्मीदवार, स्थानीय समस्याएं और चुनावी परिस्थितियां भी मतदान के फैसले को प्रभावित करती हैं।
मारहरा का अनुमानित जातीय समीकरण
मारहरा विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग समुदायों की अनुमानित आबादी को लेकर सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, लोधी और यादव मतदाताओं की संख्या अधिक बताई जाती है। इसके साथ अनुसूचित जाति, मुस्लिम और शाक्य मतदाताओं की मौजूदगी भी चुनावी विश्लेषण में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
| समुदाय | अनुमानित मतदाता संख्या |
|---|---|
| लोधी | 75,000 |
| यादव | 60,000 |
| अनुसूचित जाति | 50,000 |
| मुस्लिम | 25,000 |
| शाक्य | 22,000 |
| ठाकुर | 18,000 |
| ब्राह्मण | 10,000 |
| नाई | 9,000 |
| निषाद | 9,000 |
| राठौर (ओबीसी) | 5,000 |
| बनिया | 4,000 |
| अन्य | 3,000 |
| प्रजापति | 2,000 |
नोट: ये अनुमानित आंकड़े हैं। इन्हें आधिकारिक जातिवार मतदाता सूची नहीं माना जाना चाहिए।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषण में शाक्य, ठाकुर और निषाद मतदाताओं के साथ अनुसूचित जाति वर्ग के अलग-अलग समूहों का समर्थन भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, चुनावी नतीजों से यह निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता कि किसी समुदाय ने किस पार्टी को कितने वोट दिए।
SIR के बाद मारहरा में 22 हजार से ज्यादा मतदाता कम
मारहरा विधानसभा सीट पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में भी बदलाव दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव के समय इस विधानसभा क्षेत्र में 3,15,245 मतदाता थे। पुनरीक्षण के बाद 2026 में यह संख्या घटकर 2,92,905 रह गई।
इस तरह मतदाताओं की संख्या में 22,340 की कमी दर्ज हुई है। यह बदलाव आगामी चुनाव से पहले मतदाता सूची और मतदान से जुड़े आंकड़ों को चर्चा में ला रहा है।
हालांकि, मतदाताओं की संख्या कम होने का कारण केवल एक नहीं माना जा सकता। सूची के पुनरीक्षण में नामों का सत्यापन, स्थान परिवर्तन, मृत मतदाताओं के नाम हटाना और अन्य प्रशासनिक कारण शामिल हो सकते हैं। इसलिए इस बदलाव का चुनावी प्रभाव समझने के लिए आधिकारिक विवरण देखना जरूरी होगा।
2027 से पहले बीजेपी और सपा के सामने क्या मुद्दे होंगे?
मारहरा में पिछले विधानसभा चुनावों के नतीजे बीजेपी की जीत दिखाते हैं, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े दोनों प्रमुख दलों के बीच कम अंतर को सामने रखते हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि अलग-अलग चुनावों में दोनों दलों के प्रदर्शन में बदलाव आया है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय विकास के मुद्दे, मतदाता सूची की स्थिति और विभिन्न समुदायों के बीच राजनीतिक समर्थन अहम विषय रहेंगे। बसपा के वोटों का रुझान भी परिणामों के विश्लेषण में शामिल किया जा सकता है, लेकिन पिछले चुनाव के आंकड़ों के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि सभी मतदाता अगले चुनाव में भी उसी तरह मतदान करेंगे।
मारहरा सीट पर आगे की नजर
मारहरा विधानसभा सीट पर बीजेपी ने 2017 और 2022 में जीत दर्ज की थी। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने अपने वोट बढ़ाए और दोनों दलों के बीच अंतर घट गया। SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में कमी भी इस सीट के चुनावी परिदृश्य का एक नया पहलू है।
अब 2027 के चुनाव में उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, मतदाता सूची और मतदान के वास्तविक रुझान से ही तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल 2022 और 2024 के आंकड़े मारहरा की राजनीति में हुए बदलावों को समझने का आधार देते हैं, लेकिन आगामी चुनाव का परिणाम पहले से तय नहीं माना जा सकता।
written by Siddhi Srivastava



