
Lucknow News : राजधानी लखनऊ में जमीन के विकास और व्यावसायिक अनुबंध से जुड़े एक मामले में MI बिल्डर से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि करीब 12 हेक्टेयर संयुक्त भूमि को टाउनशिप के रूप में विकसित करने के समझौते के बावजूद निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया और जमीन के एक बड़े हिस्से को कथित तौर पर बिल्डर से जुड़ी कंपनियों को बेच दिया गया।
मामले में लखनऊ पूर्वी थाने में 1 अक्टूबर 2026 को FIR संख्या 0319 दर्ज की गई है। एफआईआर में एस.एम. कादिर अली, आयशा उमर, रफ्त उमर, मरियम कासिम और बीनू सुरेश के खिलाफ धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और 409 (आपराधिक न्यासभंग) के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं।
12 हेक्टेयर जमीन विकसित करने का था समझौता
शिकायतकर्ता के मुताबिक, विक्रय दस्तावेज और व्यावसायिक अनुबंध के तहत MI बिल्डर को करीब 12 हेक्टेयर भूमि पर टाउनशिप विकसित करनी थी। प्रस्तावित परियोजना में अपार्टमेंट, व्यावसायिक स्थान, स्कूल, नर्सिंग होम और अन्य व्यावसायिक उपयोग की सुविधाएं विकसित की जानी थीं।
आरोप है कि संयुक्त भूमि को किसी अन्य पक्ष को बेचने की अनुमति नहीं थी और बिल्डर को अपने खर्च पर विकास कार्य पूरा करना था। शिकायतकर्ता का दावा है कि बाद में समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया और जमीन के एक बड़े हिस्से को कथित तौर पर MI बिल्डर से जुड़ी दो अन्य कंपनियों को बेच दिया गया।
2026 तक जमीन बेचने की जानकारी छिपाने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जमीन को विकसित करने के बजाय उसे कथित तौर पर दूसरी कंपनियों को बेच दिया गया और इस तथ्य की जानकारी लंबे समय तक छिपाई गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे लगातार यह बताया जाता रहा कि जमीन पर टाउनशिप विकसित की जा रही है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में आपराधिक साजिश के तहत जमीन से संबंधित अधिकारों को प्रभावित करने और आर्थिक लाभ हासिल करने का प्रयास किया गया।
आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में भी गलत जानकारी देने का आरोप
मामला बाद में आर्बिट्रेशन की कार्यवाही तक पहुंचा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2022 में आर्बिट्रेटर के समक्ष गलत दस्तावेज, झूठे साक्ष्य और हलफनामा प्रस्तुत किया गया तथा जमीन के एक बड़े हिस्से को पहले ही दूसरी कंपनियों को बेचे जाने की जानकारी कथित तौर पर छिपाई गई।
शिकायतकर्ता ने इसे क्रमिक धोखाधड़ी, विश्वासघात और न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करने के प्रयास से जुड़ा मामला बताया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पहले भी आयकर विभाग की कार्रवाई का दावा
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि MI बिल्डर से जुड़े कुछ ठिकानों पर पूर्व में **आयकर विभाग की छापेमारी** हुई थी। शिकायतकर्ता ने आयकर से संबंधित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। इन दावों के संबंध में संबंधित विभाग की ओर से कोई ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया इस मामले में सामने आने की जानकारी नहीं है।
पुलिस ने शुरू की जांच
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसे बिल्डर से जान-माल का खतरा है और पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। FIR में नामजद व्यक्तियों का पक्ष या उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना जरूरी होगा।


