NALSAR छात्रों पर BCI का बड़ा यू-टर्न : नामांकन रोकने का आदेश वापस, CJI सूर्यकांत विवाद में जांच जारी

NALSAR के 2026 लॉ ग्रेजुएट्स पर BCI ने नामांकन रोकने का आदेश वापस ले लिया। CJI सूर्यकांत के दीक्षांत समारोह विवाद में तथ्यात्मक जांच जारी रहेगी।

नई दिल्ली/हैदराबाद। नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के 2026 बैच के कानून स्नातकों के नामांकन को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कुछ ही घंटों में अपना फैसला बदल दिया। CJI सूर्यकांत को लेकर दीक्षांत समारोह में छात्रों के विरोध के बीच BCI ने पहले पूरे 2026 बैच के छात्रों के राज्य बार काउंसिल में नामांकन पर रोक लगा दी थी। हालांकि, गुरुवार देर शाम परिषद ने यह आदेश वापस लेते हुए स्पष्ट किया कि सभी छात्र अपनी पसंद के राज्य बार काउंसिल में नामांकन करा सकेंगे।

BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने संशोधित आदेश में कहा कि ताजा रिपोर्ट पर विचार के बाद परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंची कि NALSAR के 2026 बैच के अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और उन्होंने किसी तरह से अनादर प्रदर्शित करने की मंशा से किसी अभियान में हिस्सा नहीं लिया था।

कुछ घंटों में BCI ने बदला फैसला

13 अगस्त को जारी शुरुआती आदेश में BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR से 2026 में कानून की डिग्री हासिल करने वाले किसी भी छात्र का अगले आदेश तक नामांकन न किया जाए।

BCI ने विश्वविद्यालय से उन लोगों की जानकारी भी मांगी थी, जिन्होंने CJI सूर्यकांत की दीक्षांत समारोह में प्रस्तावित भागीदारी के खिलाफ अभियान शुरू करने, आयोजित करने या समन्वय करने में कथित भूमिका निभाई थी।

हालांकि, बाद में BCI ने पूरे बैच पर लगी रोक को संशोधित कर दिया। चेयरमैन ने कहा कि किसी छात्र को उसकी गलती के बिना नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

CJI विवाद पर BCI की जांच रहेगी जारी

नामांकन पर लगी सामूहिक रोक भले ही हटा दी गई हो, लेकिन CJI सूर्यकांत से जुड़े विवाद की तथ्यात्मक जांच जारी रहेगी। BCI ने कहा कि उसे ऐसी रिपोर्ट मिली है कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने कथित तौर पर छात्रों को अभियान के लिए प्रेरित किया।

अब परिषद विश्वविद्यालय के कुलपति की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

क्या है NALSAR छात्रों और CJI सूर्यकांत का विवाद?

विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR के छात्रों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई।

रिपोर्ट के मुताबिक, 23 जुलाई को आउटगोइंग LLB बैच के 70 छात्रों ने इस संबंध में प्रतिनिधित्व दिया था। बाद में अन्य बैचों के छात्रों ने भी इस मांग के प्रति समर्थन जताया।

छात्रों की आपत्ति CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से संबंधित याचिका पर तत्काल सुनवाई न किए जाने और अदालत में हुई कुछ टिप्पणियों को लेकर थी।

BCI के शुरुआती आदेश पर उठे कानूनी सवाल

BCI के पहले आदेश के बाद सामूहिक रूप से पूरे बैच के नामांकन पर रोक लगाने के अधिकार को लेकर कानूनी सवाल भी उठे। Advocates Act, 1961 में वकीलों के नामांकन के लिए पात्रता और अयोग्यता तथा नामांकन प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान निर्धारित हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, नामांकन से संबंधित कार्रवाई सामान्यतः व्यक्तिगत पात्रता या अयोग्यता के आधार पर होनी चाहिए। ऐसे में पूरे बैच पर सामूहिक रोक लगाने के फैसले को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक था।

BCI के संशोधित आदेश ने फिलहाल इस विवाद का एक हिस्सा खत्म कर दिया है। 2026 बैच के सभी NALSAR स्नातक अब राज्य बार काउंसिल में नामांकन के लिए पात्र रहेंगे, जबकि CJI विवाद से जुड़ी तथ्यात्मक जांच जारी रहेगी।

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