India at UNSC: सूडान के बच्चों की पढ़ाई बचाएगा भारत का ‘DIKSHA’ मॉडल? UN में भारत ने दिया बड़ा सुझाव

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने सूडान के शिक्षा संकट पर चिंता जताई। भारत ने स्कूलों की सुरक्षा, जवाबदेही और डिजिटल शिक्षा के लिए DIKSHA मॉडल अपनाने का सुझाव दिया।

India at UNSC: सूडान में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच शिक्षा व्यवस्था पर पड़े गंभीर असर को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक व्यावहारिक और तकनीक आधारित समाधान का सुझाव दिया है। भारत ने कहा है कि युद्ध से प्रभावित और विस्थापित बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए भारत ने अपने ‘दीक्षा’ यानी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग मॉडल का उदाहरण देते हुए इसे सूडान में अपनाने की संभावना पर जोर दिया।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक उच्च स्तरीय ‘एरिया फॉर्मूला बैठक’ आयोजित की गई। बैठक का विषय ‘सूडान में शिक्षा की सुरक्षा: शांति, रिकवरी और स्थिरता में निवेश’ था। इस बैठक में भारत की ओर से काउंसलर एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस ने आधिकारिक वक्तव्य दिया। उन्होंने सूडान में नागरिकों, खासकर बच्चों और शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

भारत ने कहा कि किसी भी संघर्ष में स्कूल केवल इमारतें नहीं होते, बल्कि बच्चों के भविष्य और समाज की स्थिरता से जुड़े संस्थान होते हैं। जब स्कूलों को निशाना बनाया जाता है तो इसका असर सिर्फ वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर नहीं पड़ता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी पड़ता है। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा की सुरक्षा को शांति और पुनर्निर्माण की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

काउंसलर पुन्नूस ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सूडान में पिछले तीन वर्षों से जारी संघर्ष के कारण 1.7 करोड़ से अधिक बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है। इसके अलावा स्कूलों पर हमलों में 57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत ने इन आंकड़ों को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों और बच्चों को युद्ध की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।

भारत की ओर से स्पष्ट किया गया कि केवल स्कूलों को सुरक्षित घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है। स्कूलों और शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले करने वालों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि बिना जवाबदेही के सुरक्षा का कोई वास्तविक अर्थ नहीं रह जाता। जो लोग जानबूझकर शैक्षणिक ढांचे को निशाना बना रहे हैं, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

भारत ने यह भी रेखांकित किया कि सूडान में शिक्षा बहाल करने के लिए केवल किताबें और शिक्षक उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। बच्चों को विस्थापन, हिंसा और असुरक्षा से निकालना होगा। इसके साथ ही भोजन, दवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करनी होगी। इन बुनियादी परिस्थितियों के बिना बच्चों को दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना बेहद मुश्किल होगा।

बैठक में भारत ने अपने मानवीय सहयोग का भी उल्लेख किया। भारतीय प्रतिनिधि ने सूडान में करीब 600 लाभार्थियों के लिए आयोजित कृत्रिम अंग यानी प्रोस्थेटिक लिम्ब कैंप का जिक्र किया। इसके जरिए भारत ने यह संदेश दिया कि संकट के दौरान मानवीय सहायता और पुनर्वास के प्रयास शिक्षा बहाली के साथ-साथ चलने चाहिए।

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भारत ने विशेष रूप से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी DPI को शिक्षा व्यवस्था के लिए उपयोगी विकल्प बताया। युद्ध के कारण जिन क्षेत्रों में स्कूल की इमारतें नष्ट हो गई हैं या जहां बच्चों का नियमित स्कूल पहुंचना संभव नहीं है, वहां डिजिटल माध्यमों के जरिए शिक्षा जारी रखी जा सकती है। इसी संदर्भ में भारत ने अपने ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म का उदाहरण दिया।

DIKSHA यानी Digital Infrastructure for Knowledge Sharing भारत का डिजिटल शिक्षा मंच है, जिसके माध्यम से शिक्षण सामग्री और शैक्षणिक संसाधनों तक डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराई जाती है। भारत का सुझाव है कि सूडान जैसे संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में इसी तरह के डिजिटल समाधान का इस्तेमाल करके बच्चों की पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सकता है।

भारत का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब सूडान का शिक्षा क्षेत्र संघर्ष के कारण गंभीर संकट से गुजर रहा है। लंबे समय तक स्कूल बंद रहने, शिक्षा संस्थानों के क्षतिग्रस्त होने, परिवारों के विस्थापन और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों ने लाखों बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित किया है। ऐसे में डिजिटल शिक्षा उन इलाकों में एक वैकल्पिक माध्यम बन सकती है, जहां पारंपरिक स्कूल व्यवस्था तत्काल बहाल करना संभव नहीं है।

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यह संदेश देने की कोशिश की कि शिक्षा को मानवीय सहायता के साथ-साथ शांति निर्माण और दीर्घकालिक स्थिरता का आधार भी माना जाना चाहिए। स्कूलों की सुरक्षा, बच्चों की बुनियादी जरूरतों की पूर्ति, जवाबदेही और डिजिटल तकनीक—इन सभी को एक साथ आगे बढ़ाने से ही सूडान के बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

सूडान में संघर्ष कब खत्म होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन भारत का ‘दीक्षा’ मॉडल का सुझाव इस बात की ओर संकेत करता है कि युद्ध के बीच भी तकनीक के माध्यम से शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के नए रास्ते खोजे जा सकते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने रुख के जरिए शिक्षा को केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि शांति, पुनर्निर्माण और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।

रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी

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