
Unnao News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उन्नाव के चर्चित दुर्गेश मिश्रा उर्फ खोनू मामले में दाखिल हैबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अब तक की पुलिस जांच में यह साबित नहीं हुआ है कि दुर्गेश मिश्रा को रेस्पोंडेंट संख्या 4 से 7 ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही मामले की एफआईआर पर पुलिस की जांच अभी भी जारी है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि दुर्गेश मिश्रा उर्फ खोनू को रेस्पोंडेंट संख्या 4 से 7 ने गैरकानूनी तरीके से अपनी हिरासत में रखा हुआ है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पहले पुलिस को निर्देश दिया था कि यदि दुर्गेश मिश्रा संबंधित लोगों की अभिरक्षा में मिलते हैं तो उन्हें बरामद कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
न्यायालय के निर्देश के बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान कई विवेचना पर्चे तैयार किए गए और संभावित स्थानों पर तलाश अभियान चलाया गया। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद दुर्गेश मिश्रा का कोई पता नहीं चल सका।
सुनवाई के दौरान थाना गंगाघाट के प्रभारी निरीक्षक ने न्यायालय में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर बताया कि पुलिस लगातार दुर्गेश मिश्रा की तलाश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक की जांच में ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि रेस्पोंडेंट संख्या 4 से 7 ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा था।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूनम कुशवाहा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसले का हवाला दिया। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की गुमशुदगी के संबंध में एफआईआर दर्ज है और उसकी जांच पुलिस पहले से कर रही है, जबकि अवैध हिरासत का आरोप भी प्रथम दृष्टया साबित नहीं होता है, तो ऐसी स्थिति में समानांतर रूप से दाखिल हैबियस कॉर्पस याचिका विचारणीय नहीं होती।
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इन्हीं तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हैबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 232/2026 को खारिज कर दिया।
इस मामले में रेस्पोंडेंट संख्या 4 से 7 की ओर से अधिवक्ता चैतन्य तिवारी ने न्यायालय में पक्ष रखा। वहीं पुलिस ने अदालत को भरोसा दिलाया कि दुर्गेश मिश्रा की तलाश और मामले की विवेचना आगे भी जारी रहेगी।



