
Anti-Paper Leak Bill Debate: लोकसभा से पारित होने के बाद पब्लिक एग्जामिनेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा। चर्चा की शुरुआत राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। हालांकि, बिल पर बहस के दौरान उनकी एक टिप्पणी ने सदन का माहौल गरमा दिया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
खरगे ने सरकार पर साधा निशाना
चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश में बार-बार हुए पेपर लीक से लाखों छात्रों और उनके परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उनका आरोप था कि सरकार ने नए विधेयक में सजा और जुर्माने की राशि तो बढ़ा दी है, लेकिन परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि कड़ा कानून लाने की मांग विपक्ष वर्ष 2024 से करता रहा है, लेकिन सरकार ने उस समय इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार यदि समय रहते सख्त कानून लागू किया गया होता तो कई पेपर लीक की घटनाओं को रोका जा सकता था।
मनुस्मृति पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद
अपने भाषण के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए शिक्षा व्यवस्था और जातिगत भेदभाव को लेकर टिप्पणी की। इसी बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।
नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता ने जो टिप्पणी की है, वह तथ्यों पर आधारित नहीं है और पहले मूल ग्रंथ का प्रमाण प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
गिरिराज सिंह ने मांगी माफी, विपक्ष ने किया विरोध
खरगे की टिप्पणी के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उनसे सदन में माफी मांगने की मांग की। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया और सदन में नारेबाजी होने लगी। कुछ समय तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी रही, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई।
सभापति ने बयान रिकॉर्ड से हटाने का दिया निर्देश
लगातार बढ़ते हंगामे के बीच सभापति ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि विवादित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाया जाएगा। इसके बाद मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी को रिकॉर्ड से एक्सपंज (Expunge) करने का निर्णय लिया गया।
क्या है एंटी-पेपर लीक बिल 2026?
सरकार का कहना है कि पब्लिक एग्जामिनेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 का उद्देश्य भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा घोटालों पर सख्त कार्रवाई करना है।
विधेयक में दोषियों के लिए पहले से अधिक कड़ी सजा, भारी आर्थिक जुर्माना, स्पेशल टास्क फोर्स और मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
अब आगे क्या?
राज्यसभा में बिल पर चर्चा जारी है। बहस पूरी होने के बाद सदन में विधेयक पर मतदान कराया जाएगा। यदि यह राज्यसभा से भी पारित हो जाता है, तो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा।



