US Iran War: ट्रंप की धमकी के बाद ईरान पर अमेरिका का ताबड़तोड़ हमला, IRGC के कई ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सेना का दावा- ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई, सभी बैलिस्टिक मिसाइलें इंटरसेप्ट की गईं।

US Iran War: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिका ने ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए मिसाइल हमलों के जवाब में की गई।

CENTCOM के अनुसार, अभियान बुधवार रात लगभग 10 बजे पूरा हुआ। हमलों में IRGC के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, तटीय निगरानी केंद्र, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों, वाणिज्यिक जहाजों और खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों के लिए पैदा हुए खतरों को कम करना था।

अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि एक दिन पहले ईरान ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, लेकिन सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया गया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

CENTCOM ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम एशिया में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और सभी बल पूरी तरह सतर्क तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य निगरानी को और मजबूत कर दिया गया है।

इन हमलों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अमेरिका जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार है और ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में कूटनीतिक समाधान की संभावना भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

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इसी बीच मिस्र के भूमध्यसागरीय बंदरगाह डेमिटा में अमेरिका के स्वामित्व वाले एक एलएनजी पोत पर ड्रोन हमले और विस्फोट की घटना ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि और जिम्मेदार पक्ष को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

लगातार बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

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