Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत निर्जला क्यों रखा जाता है? जानें धार्मिक मान्यता और पूजा के जरूरी नियम

Hartalika Teej 2026: Why is the Hartalika Teej fast observed without water (Nirjala)? Learn about the religious beliefs and essential rules for the worship.

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में शामिल है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई जगह कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत माता पार्वती की कठिन तपस्या से जुड़ा हुआ है। इस दिन कई महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल ग्रहण नहीं करती हैं। इसी कारण इसे निर्जला व्रत कहा जाता है। आइए जानते हैं इस परंपरा से जुड़ी मान्यता और पूजा के प्रमुख नियम।

माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक कठोर तपस्या की। मान्यता है कि उनकी साधना और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

इसी कथा की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत रखने की परंपरा मानी जाती है। महिलाएं इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।

क्यों कहा जाता है इसे निर्जला व्रत?

हरतालिका तीज में निर्जला उपवास की परंपरा है। इसमें व्रती दिनभर भोजन और पानी का सेवन नहीं करती हैं। शाम को पूजा करने के बाद भी कई स्थानों पर अगले दिन पारंपरिक विधि से व्रत खोलने की मान्यता है।

यह व्रत कठिन माना जाता है, इसलिए स्वास्थ्य को ध्यान में रखना भी जरूरी है। किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक निर्जल रहना उचित नहीं है।

सोलह श्रृंगार का भी है विशेष महत्व

हरतालिका तीज पर महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। पूजा के दौरान माता पार्वती को भी सुहाग से जुड़ी वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है।

मान्यता के अनुसार, सोलह श्रृंगार वैवाहिक सुख और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं मेहंदी, चूड़ी, बिंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री से खुद को सजाती हैं।

हरतालिका तीज 2026 पूजा का समय

इस वर्ष हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। दिए गए मुहूर्त के अनुसार, पूजा के लिए सुबह 5:00 बजे से 7:06 बजे तक का समय शुभ बताया गया है।

इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 बजे से 5:19 बजे तक रहेगा। पूजा के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

व्रत के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान गणेश की पूजा भी करें।
  • माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
  • भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
  • हरतालिका तीज की कथा सुनें या पढ़ें।
  • पूजा के दौरान सात्विक आचरण और सकारात्मक भाव बनाए रखने की कोशिश करें।
  • स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर निर्जला व्रत रखने को लेकर चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।
  • अगले दिन परंपरा और स्थानीय मान्यता के अनुसार व्रत का पारण करें।

हरतालिका तीज सिर्फ उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि इसे भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति आस्था और समर्पण से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि इस दिन पूजा, कथा और पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष महत्व माना जाता है।

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