Samay Raina Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर लगाया 3 लाख रुपये का जुर्माना, आदेशों की अनदेखी पर लगाई कड़ी फटकार

'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य संबंधित लोगों को कोर्ट के आदेशों का पालन न करने पर फटकार लगाई। अदालत ने दो सप्ताह में जुर्माना जमा करने और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

Samay Raina Controversy: मशहूर कॉमेडियन समय रैना एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि आदेशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने अदालत को गंभीरता से नहीं लिया और कोर्ट के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि किसी भी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह अदालत के निर्देशों की अनदेखी करे।

कोर्ट ने समय रैना और मामले से जुड़े अन्य लोगों को दो सप्ताह के भीतर जुर्माना जमा करने और अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला समय रैना के यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के पहले सीजन से जुड़ा है। आरोप है कि शो के कुछ एपिसोड में दृष्टिबाधित लोगों और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाया गया था।

इस मामले को लेकर क्योर एसएमए फाउंडेशन ने अदालत का रुख किया था। विवाद बढ़ने के बाद समय रैना और शो से जुड़े अन्य कॉमेडियंस ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी और भविष्य में संवेदनशीलता बरतने का आश्वासन दिया था।

कोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि समय रैना ने अदालत से किए गए वादों का पालन नहीं किया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने न तो एसएमए फाउंडेशन से संपर्क किया और न ही प्रभावित लोगों से मिलने या जागरूकता अभियान चलाने जैसे कदम उठाए।

इसी आधार पर अदालत ने माना कि केवल माफीनामा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों का वास्तविक पालन भी जरूरी है।

सख्त कानून बनाने पर भी हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों का मजाक उड़ाने को लेकर चिंता जताई। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि SC/ST एक्ट की तर्ज पर ऐसा कानून बनाने पर विचार किया जा सकता है, जिसमें दिव्यांग लोगों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ स्पष्ट दंड का प्रावधान हो।

सॉलिसिटर जनरल ने भी अदालत से सहमति जताते हुए कहा कि किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाकर मनोरंजन नहीं किया जा सकता।

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अगला कदम क्या होगा?

अब समय रैना और मामले से जुड़े अन्य लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया तो सुप्रीम कोर्ट आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

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