Ayodhya : राम मंदिर दान चढ़ावे में चोरी के बीच विंग कमांडर धीरेन्द्र सिंह जफा का दशकों पुराना सवाल फिर चर्चा में, जानिये क्या कहा था?

Ayodhya : राम मंदिर में चढ़ावा विवाद के बीच राम मंदिर आंदोलन से जुड़े विंग कमांडर धीरेन्द्र सिंह जफा का 2016 का बयान फिर चर्चा में है। उन्होंने कहा था, 'मंदिर तो जरूर बनेगा, पर क्या हम राममय हो पाएंगे?' जानिए पूरा संदर्भ।

Ayodhya : राम मन्दिर में चढ़ावा चोरी- एक दशक पूर्व मन्दिर आंदोलनकारी धीरेन्द्र सिंह जफ़ा के यक्ष प्रश्न। अभी अभी तो अयोध्या सजी थी, राम लला विराजमान हुए, ध्वजारोहण हुआ सारी दुनिया ने देखा-अयोध्या का वैभव, हर्षित संत समाज, राममय आम जनमानस। भक्तों की भारी भीड़ थी ठसाठस, सारे भक्त थे? कह नहीं सकते, तो क्या उसमें चोर भी थे। हाँ थे, पर सामान्य चोर नहीं, चढ़ावा चोर थे। कभी दिखे नहीं, दिखते कैसे वो तो वहीं थे मंदिर के अंदर, दान पात्र की चाबी लिए, श्री चरणों से श्री चुराने की फिराक में किस को पता था कि अयोध्या को ये दिन भी देखना पड़ेगा, जहां राजपद को त्याग कर वनवास चुना जाता है। जहां के राजकुमार अन्याय और दुष्चक्र से मिली सत्ता को छोड़कर स्वयं ही संन्यास धारण कर लेते हैं और साधु, त्यागी तपस्वी सा जीवन व्यतीत करते हैं। आज उसी नगरी में, सारी मर्यादाओं को तिलांजलि देकर भक्त, भगवान और आस्था के साथ ऐसा विश्वासघात।

राम मंदिर आंदोलन में अनेक महापुरुषों का योगदान रहा है, आज वो क्या सोच रहें होंगे। उनकी आत्मा पर क्या बीत रही होगी…. क्या उन्होंने कभी ऐसा सोचा भी होगा। अतीत में झांककर स्मृतियों के पुनर्गठन से उजागर होता है कि भारतीय वायु सेना के प्रसिद्ध फाइटर पायलट वीर चक्र से सम्मानित, विंग कमांडर धीरेन्द्र सिंह जफा ने कुछ ऐसी चिंता एक दशक पूर्व ही व्यक्त कर दी थी। एक अखबार को दिसंबर, 2016 में दिये साक्षात्कार अग्रसोची श्री जफा ने यह पूछने पर कि ‘क्या जन्मभूमि पर राम मंदिर बन पाएगा? इस पर उन्होंने कहा था कि ‘मंदिर तो जरूर बनेगा, परंतु क्या हम राममय हो पाएंगें? हार्डवेयर तो कभी भी लगाया जा सकता है, क्या उसके समानांतर सॉफ्टवेयर का विकास किया जा सकता है? क्या हम वास्तव में राम के आदर्शों को आत्मसात कर पाएंगें।’

यह ऐतहासिक साक्षात्कार वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जय सियाराम’ में उपलब्ध है। राम मंदिर निर्माण आंदोलन की श्रृंखला में धीरेन्द्र सिंह जफ़ा के अद्वितीय योगदान का उल्लेख करते हुए भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री पी. बी. नरसिम्हा राव ने अपनी पुस्तक ‘अयोध्या 1992’ में लिखा है कि वर्ष 1949 में विवादित ढांचे में मूर्ति प्रकट होने के बाद से हर साल रामप्राकट्य उत्सव का आयोजन आयोध्यावासी करते थे, परन्तु वर्ष 1984 का रामप्राकट्य उत्सव का नेतृत्व धीरेन्द्र सिंह जफ़ा द्वारा किया गया, जो विशेष उत्साह के साथ मनाया गया और राममंदिर आंदोलन के इतिहास में पहली बार विवादित ढांचे के बुर्ज पर हनुमान पताका फहराई गई और गर्भगृह में पहली बार हवन किया गया। ये दोनों ही बातें अभूतपूर्व एवं अति महत्वपूर्ण थीं। जिसकी खबर जंगल की आग की तरह पूरे देश में फैल गई और इसका असर पूरे भारत में हुआ। मंदिर आनंदोलन को नयी गति, दिशा और ऊर्जा मिली।

आज श्री जफ़ा की भविष्य वाणी सत्य हुई। मंदिर तो बनकर तैयार हो गया, परंतु वर्तमान घटनाओं के संदर्भ में उनके द्वारा व्यक्त चिंता वास्तव में यक्ष प्रश्न बनकर आज हम सभी के सामने खड़ी है, जिनके समाधान के लिए अयोध्या के अस्तित्व और प्रभु श्री राम की मर्यादा को पुनः स्थापित करने के लिए प्रत्येक राम भक्त के सद्प्रयासों और योगदान के अंश की दरकार सदैव बनी रहेगी।

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