
अब क्लास छूटने पर भी नहीं पिछड़ेगी छात्रों की पढ़ाई
इसी सत्र जुलाई से शुरू हो जाएगी यह व्यवस्था
उच्च शिक्षा को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय अब कक्षाओं में दिए जाने वाले व्याख्यानों को रिकॉर्ड कर उन्हें डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य उन छात्रों को पढ़ाई में सहायता प्रदान करना है, जो किसी कारणवश कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो पाते या किसी विषय को दोबारा समझना चाहते हैं।
कक्षा में दिए गए व्याख्यानों की रिकॉर्डिंग से छात्रों को मिलेगा लाभ
विश्वविद्यालय के कला संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर विवेक सिंह के अनुसार इस परियोजना के तहत अब तक कुछ व्याख्यान रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। इसी के साथ उन्होंने बताया कि इस सत्र के जुलाई से यह व्यवस्था प्रारंभ कर दी जाएगी। इन व्याख्यानों को डिजिटल माध्यम से छात्रों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 700 से अधिक कॉलेजों के विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित होगी। नई व्यवस्था के अंतर्गत शिक्षकों द्वारा कक्षा में दिए गए व्याख्यानों को आधुनिक तकनीक की सहायता से रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके बाद इन्हें विश्वविद्यालय के डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। छात्र अपने लॉगिन के माध्यम से कभी भी और कहीं से भी इन व्याख्यानों को देख सकेंगे। इससे न केवल छूटी हुई कक्षाओं की भरपाई हो सकेगी, बल्कि कठिन विषयों को बार-बार सुनकर समझने का अवसर भी मिलेगा।
विषयों की बेहतर समझ और परीक्षा की तैयारी होगी आसान
विश्वविद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि डिजिटल सामग्री विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त अध्ययन संसाधन के रूप में कार्य करेगी। कई बार कक्षा में पढ़ाए गए विषयों को छात्र पूरी तरह समझ नहीं पाते हैं। ऐसे में रिकॉर्डेड व्याख्यान उन्हें विषय को दोबारा सुनने और अपनी शंकाओं को दूर करने में मदद करेंगे। इससे सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बन सकेगी। इस पहल का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय से जुड़े अनेक कॉलेज ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां संसाधनों और विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता सीमित है। रिकॉर्डेड व्याख्यानों के माध्यम से इन छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। इससे शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
सैकड़ों व्याख्यानों का डिजिटल संग्रह है लक्ष्य
विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में विभिन्न विषयों के सैकड़ों व्याख्यानों का डिजिटल संग्रह तैयार करना है। इसके लिए शिक्षकों को भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल शिक्षा के इस मॉडल से छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार होगा और वे प्रतियोगी परीक्षाओं व विश्वविद्यालय परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर सकेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि बदलते समय में डिजिटल लर्निंग शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे प्रयास छात्रों को तकनीक आधारित अध्ययन के लिए प्रेरित करेंगे और उन्हें आत्मनिर्भर शिक्षार्थी बनने में सहायता देंगे। विश्वविद्यालय की यह पहल उच्च शिक्षा में नवाचार और तकनीक के समावेश का उदाहरण बनकर सामने आ रही है। इससे हजारों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी और शिक्षा का दायरा कक्षा की चारदीवारी से निकलकर डिजिटल मंच तक विस्तारित हो सकेगा।
रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी



