दरभंगा में मदरसे के 4 बच्चों के पैरों में मिली बेड़ियां, प्रताड़ना के आरोपों से मचा हड़कंप

बिहार के दरभंगा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। बहादुरपुर थाना क्षेत्र में चार नाबालिग बच्चे संदिग्ध परिस्थितियों में मिले, जिनके पैरों में लोहे की बेड़ियां और बड़े ताले लगे हुए थे। बच्चों की हालत देखकर आसपास के लोग स्तब्ध रह गए। देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चारों बच्चे कड़ी धूप में एक स्थान पर बैठे हुए थे और काफी थके हुए दिखाई दे रहे थे। जब ग्रामीणों की नजर उनके पैरों पर पड़ी तो वे चौंक गए। बच्चों के दोनों पैरों में लोहे की जंजीरें और ताले लगे हुए थे। लोगों ने तुरंत उनसे बातचीत की और यह जानने की कोशिश की कि आखिर उनके साथ क्या हुआ है।

बच्चों ने बताया कि वे दरभंगा के अशोक पेपर मिल थाना क्षेत्र स्थित मदरसा सैफुल उलूम में पढ़ते हैं। सभी बच्चे मधुबनी जिले के अररिया संग्राम गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। बच्चों के आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।

बच्चों का दावा है कि मदरसे के संचालक मौलाना कदीर उन्हें बंधक बनाकर रखते थे। उनका कहना है कि अगर कोई बच्चा विरोध करता या वहां से जाने की कोशिश करता, तो उसके साथ मारपीट की जाती थी। बच्चों ने आरोप लगाया कि उन्हें भागने से रोकने के लिए पैरों में जंजीरें बांधी जाती थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने डंडों से पिटाई और शारीरिक प्रताड़ना के भी आरोप लगाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के शरीर पर चोट के निशान भी दिखाई दे रहे थे। यह देखकर लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। स्थानीय लोगों ने घटना को अमानवीय बताते हुए तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दी।

मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने बच्चों को अपने संरक्षण में लिया और उनसे विस्तृत पूछताछ की। इसके बाद सभी बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया गया ताकि उनके स्वास्थ्य और कथित प्रताड़ना के आरोपों की जांच की जा सके। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें बाल गृह भेज दिया गया है।

इस मामले में पुलिस ने मदरसा संचालक मौलाना कदीर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई पुलिस अवर निरीक्षक एवं बाल कल्याण पदाधिकारी अबुजर हुसैन की लिखित शिकायत के आधार पर की गई। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने पूरे मदरसे की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

फिलहाल पुलिस जांच में जुटी हुई है और बच्चों के बयानों के साथ अन्य साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है। यह मामला एक बार फिर बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और शैक्षणिक संस्थानों में निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों के लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं।

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