
New Delhi News-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के ‘सेवा के 12 वर्ष’ पूरे होने पर विदेश मंत्री डॉ० एस० जयशंकर ने भारतीय विदेश नीति में आए युगांतकारी परिवर्तनों को रेखांकित किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की गई एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में विदेश मंत्रालय और भारत की विदेश नीति का पूरी तरह कायाकल्प हो चुका है, जिससे कूटनीति अब अधिक ‘नागरिक-केंद्रित’ और सक्रिय बन गई है।
विदेश मंत्री ने देश के आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले की जटिल व्यवस्थाओं के विपरीत, अब देश में पासपोर्ट जारी करने और दस्तावेजों के सत्यापन (अटेस्टेशन) की प्रक्रिया को बेहद सुगम और पारदर्शी बना दिया गया है। सरकार ने जन-शिकायतों के त्वरित निवारण और फीडबैक के लिए आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं, जिससे नागरिकों को तत्काल सहायता मिल रही है।
डॉ. जयशंकर ने वैश्विक संकटों के दौरान भारत की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यूक्रेन, इजरायल, अफगानिस्तान और सूडान जैसे युद्धग्रस्त और संकटग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के अभियानों ने दुनिया में भारत की साख बढ़ाई है। प्रवासियों और विदेशों में रह रहे भारतीयों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने वैश्विक स्तर पर 44 नए दूतावास और वाणिज्य दूतावास खोले हैं। इसके साथ ही, 21 वैश्विक गतिशीलता समझौतों (मोबिलिटी पार्टनरशिप) के जरिए भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्यस्थलों तक पहुंच आसान की गई है।
विदेश नीति को देश के आर्थिक विकास से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवसायों को विदेशों में बाजार दिलाने और निर्यात बढ़ाने में मंत्रालय ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कूटनीति अब ’24/7′ (चौबीसों घंटे) देश की सेवा में समर्पित है। वर्तमान में वैश्विक मंच पर भारत का हर फैसला ‘भारत-पहले’ (इंडिया-फर्स्ट) की नीति और राष्ट्रीय हितों से प्रेरित होता है, जिसने प्रत्येक भारतीय को विदेश यात्रा के दौरान एक अभूतपूर्व आत्मविश्वास और गौरव की अनुभूति कराई है।
इस दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर लिखा पिछले 12 सालों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में भी बड़ा बदलाव आया है, जिससे ‘ब्रांड इंडिया’ और ग्लोबल मंच पर भारत की स्थिति मज़बूत हुई है। ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ बनने से लेकर संकट के समय सबसे पहले मदद करने वाले (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) देश के तौर पर सामने आने तक, और इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसी पहलों के ज़रिए क्लाइमेट एक्शन को बढ़ावा देने से लेकर सीमाओं के पार यूपीआई जैसी डिजिटल पब्लिक गुड्स को आगे बढ़ाने तक, भारत ने राष्ट्रीय हित और वैश्विक भलाई को एक साथ साधा है।
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रिपोर्ट-शाश्वत तिवारी



