
Middle East War : अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मध्य पूर्व में शांति और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए Saudi Arabia, Pakistan, Turkey, Qatar, Egypt और Jordan से तुरंत इस समझौते का हिस्सा बनने का आग्रह किया।
ट्रंप ने कहा कि वह “अनिवार्य रूप से अनुरोध” कर रहे हैं कि सभी देश जल्द से जल्द अब्राहम समझौतों पर हस्ताक्षर करें ताकि मध्य पूर्व को आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।
ईरान को भी समझौते में शामिल करने के संकेत
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यदि Iran अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करता है, तो उसे भी इस वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बनाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि इससे मध्य पूर्व दुनिया के सबसे शक्तिशाली और आर्थिक रूप से मजबूत क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि उनके प्रतिनिधियों को संबंधित देशों के साथ बातचीत शुरू करने और अब्राहम समझौते के विस्तार की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया है।
क्या हैं अब्राहम समझौते?
अब्राहम समझौते अमेरिका की मध्यस्थता में हुए ऐसे समझौतों की श्रृंखला हैं, जिनका उद्देश्य Israel और अरब देशों के बीच राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना है।
साल 2020 में इस समझौते पर सबसे पहले United Arab Emirates और Bahrain ने हस्ताक्षर किए थे। बाद में Morocco और Sudan भी इससे जुड़े। नवंबर 2025 में Kazakhstan ने भी इसमें शामिल होने पर सहमति जताई थी।
फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर जारी विवाद
कई अरब देशों और संगठनों ने अब्राहम समझौतों की आलोचना भी की है। उनका कहना है कि इन समझौतों में फिलिस्तीनी मुद्दे और दो-राष्ट्र समाधान का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
साल 2002 में अरब लीग की ओर से पेश की गई ‘अरब शांति पहल’ में यह शर्त रखी गई थी कि इज़रायल के साथ संबंध सामान्य करने से पहले स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना और कब्जे वाले इलाकों से इज़रायली सेना की वापसी जरूरी होगी।
ईरान तनाव के बीच बदला क्षेत्रीय समीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान के प्रभाव को लेकर कई देशों की रणनीति बदल रही है। हाल के वर्षों में ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं।
इसी संदर्भ में ट्रंप का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने मध्य पूर्व के देशों को एक बड़े कूटनीतिक और आर्थिक गठबंधन के तहत जोड़ने की कोशिश की है।



