
International News: United Nations Security Council में ‘सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा’ विषय पर आयोजित वार्षिक खुली बहस के दौरान भारत ने आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। भारत ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने की जरूरत पर जोर देते हुए आतंकवाद को शरण और समर्थन देने वाले देशों की वैश्विक जवाबदेही तय करने की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि P. Harish ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहा है। उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों को जवाबदेह ठहराना समय की जरूरत है।
1971 के ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ का किया उल्लेख
भारतीय प्रतिनिधि ने अपने संबोधन में 1971 के ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के इतिहास को कलंकित बताया। उन्होंने कहा कि उस दौरान पाकिस्तान की सेना द्वारा बड़े पैमाने पर नागरिकों पर अत्याचार और नरसंहार किए गए थे।
भारत के स्थायी मिशन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पाकिस्तान की सेना ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ अमानवीय हिंसा को अंजाम दिया था। भारतीय पक्ष ने इसे मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया।
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अफगानिस्तान में हमलों का भी उठाया मुद्दा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए सीमा पार हमलों का भी मुद्दा उठाया। रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में सैकड़ों अफगान नागरिकों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए।
भारत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं और वैश्विक समुदाय को मिलकर इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।
नागरिकों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
अपने संबोधन के अंत में भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना होगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन और जवाबदेही को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।



