
Delhi News: दिल्ली सरकार ने बढ़ती ईंधन खपत और वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने निजी कंपनियों और व्यावसायिक संस्थानों से हफ्ते में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की अपील की है। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की बचत के साथ ट्रैफिक दबाव भी कम होगा।
सरकार की ओर से जारी सलाह में कहा गया है कि कंपनियां कर्मचारियों के लिए अलग-अलग ऑफिस टाइमिंग भी लागू करें। इससे पीक आवर्स में सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में राहत मिल सकती है। इसके अलावा कार-पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है।
इसी के साथ कंपनियों को गैर-जरूरी यात्राएं कम करने और ज्यादा से ज्यादा वर्चुअल मीटिंग करने की सलाह दी गई है। सरकार का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम मॉडल सफल साबित हुआ था और अब उसी अनुभव का इस्तेमाल ईंधन बचाने के लिए किया जा सकता है।
New Delhi: भारत ने अस्थिर समय में समूह की ‘रचनात्मक, स्थिर भूमिका’ पर दिया जोर
हालांकि अस्पताल, बिजली, पानी और सफाई जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़े संस्थानों को इस सलाह से बाहर रखा गया है ताकि जरूरी सेवाओं पर कोई असर न पड़े।
यह पहल ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ अभियान का हिस्सा है, जिसे 90 दिनों के लिए शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों और संस्थानों के बीच ईंधन बचत को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। इससे पहले सरकारी कर्मचारियों के लिए भी दो दिन वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू की जा चुकी है।
दिल्ली सरकार का कहना है कि रोजाना ऑफिस आने-जाने में बड़ी मात्रा में ईंधन खर्च होता है। ऐसे में अगर निजी क्षेत्र भी इस अभियान में सहयोग करता है तो राजधानी में ईंधन की खपत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सरकार ने कंपनियों से कर्मचारियों को ईंधन बचत के महत्व के बारे में जागरूक करने की भी अपील की है। साथ ही घर से काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जरूरी आईटी सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है ताकि कामकाज प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल बड़े स्तर पर लागू होती है तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्या में भी कमी आ सकती है।



