
Election Commission controversy : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा के सभापति ने 63 सांसदों द्वारा दिए गए महाभियोग नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। वहीं लोकसभा के स्पीकर ने भी इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
यह नोटिस 12 मार्च 2026 को सौंपा गया था, जिस पर कुल 193 सांसदों (130 लोकसभा और 63 राज्यसभा) के हस्ताक्षर थे। आजादी के बाद यह पहली बार था जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ऐसा प्रयास किया गया।
नोटिस संविधान के अनुच्छेद 324(5) और 124(4) के तहत दिया गया था। विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण आचरण, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितता और चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
हालांकि, सभापति ने सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद कहा कि महाभियोग प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं है। इसके साथ ही यह प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है।
विपक्ष ने कुल सात आरोप लगाए थे, जिनमें ‘सिद्ध कदाचार’, ‘चुनावी धोखाधड़ी की जांच में बाधा’ और ‘मताधिकार से वंचित करना’ जैसे मुद्दे शामिल हैं। खासतौर पर बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे।


