
TET Mandatory: देशभर में करीब 20 लाख शिक्षकों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद अब 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए Teacher Eligibility Test (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर ये शिक्षक अगले दो साल के भीतर TET पास नहीं करते हैं, तो उनकी नौकरी पर खतरा मंडरा सकता है।
दरअसल, जब ये शिक्षक भर्ती हुए थे, उस समय TET की अनिवार्यता लागू नहीं थी। लेकिन अब कोर्ट के इस फैसले ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसी के विरोध में देशभर के शिक्षक दिल्ली के रामलीला मैदान में एकजुट हुए और Teachers Federation of India के बैनर तले प्रदर्शन किया।
शिक्षकों का कहना है कि कई वर्षों तक पढ़ाने के बाद अब उनसे परीक्षा देने को कहना अनुचित है। उनका तर्क है कि नियमों को बीच में बदलना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षक संगठनों का मानना है कि सरकार को परीक्षा के बजाय अनुभवी शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना चाहिए, ताकि वे नई शिक्षा प्रणाली के अनुरूप खुद को अपडेट कर सकें।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि शिक्षकों की मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
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गौरतलब है कि 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया था कि शिक्षा का अधिकार लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी TET अनिवार्य होगा। अब शिक्षक संगठनों की मांग है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को इस नियम से छूट दी जाए और सरकार इस पर अध्यादेश लाए। फिलहाल, यह मामला शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
Written By: Kalpana Pandey



