Lucknow Book Fair 2026 : लखनऊ पुस्तक मेले में ‘अफसाना लिख रहा हूँ’ का विमोचन, अनुपमा जायसवाल ने बताया सिनेमा को समाज का आईना

Lucknow Book Fair 2026 : लखनऊ पुस्तक मेले में ‘अफसाना लिख रहा हूँ’ पुस्तक का विमोचन, अनुपमा जायसवाल ने भारतीय सिनेमा की सामाजिक भूमिका को बताया अहम।

Lucknow Book Fair 2026 :  लखनऊ पुस्तक मेले में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. मनीष शुक्ल तथा डॉ. राखी बख्शी के संपादन में प्रकाशित पुस्तक “अफसाना लिख रहा हूँ” का भव्य विमोचन किया गया।

लेखक मंच पर आयोजित समारोह की मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं विधायक अनुपमा जायसवाल ने अपने विस्तृत वक्तव्य में कहा कि “अफसाना लिख रहा हूँ” केवल फिल्मों पर आधारित एक सामान्य पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की आत्मा को शब्दों में संजोने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक सिनेमा और समाज के बीच सेतु का कार्य करती है, जिससे पाठक न केवल फिल्मों के इतिहास से जुड़ते हैं, बल्कि उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक प्रभावों को भी गहराई से समझ पाते हैं।

छात्रों के उपयोगी सिद्ध होगी पुस्तक

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सिनेमा ने समय-समय पर समाज को दिशा देने, जनभावनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करने और देश की विविधता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। इस पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी को सिनेमा की समृद्ध परंपरा, उसके संघर्ष, विकास और बदलते स्वरूप को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने संपादकों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक कार्य न केवल सिनेमा प्रेमियों के लिए उपयोगी हैं, बल्कि शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री सिद्ध होंगे।

विशिष्ट अतिथि राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र ने कहा कि यह पुस्तक फिल्मों के इतिहास को संजोने के साथ-साथ भविष्य की फिल्मी यात्रा का भी संकेत देती है।

पुस्तक में विशेषज्ञों के लेख शामिल

पुस्तक के संपादक डॉ. मनीष शुक्ल ने बताया कि इसमें देशभर के 13 प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के लेख शामिल हैं, जिनमें दादा साहब फाल्के के युग से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म के आधुनिक सिनेमा तक का व्यापक विश्लेषण किया गया है। वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर अग्निहोत्री ने कहा कि इस पुस्तक में फिल्मों के 100 वर्षों से अधिक की ऐतिहासिक यात्रा का समग्र चित्रण किया गया है। मूक फिल्मों से लेकर बोलती फिल्मों तक, तथा उसके बाद के दौर के कलाकारों और डिजिटल युग में सिनेमा के बदलते स्वरूप का इसमें विस्तार से वर्णन है।

शिल्पायन प्रकाशन की इस पुस्तक के विमोचन अवसर पर भारत-तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय मंत्री (महिला शाखा) राधा पांडेय ने कहा कि यह कृति फिल्मों के विविध आयामों को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है। उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह ने डॉ. शिल्पी शुक्ला बख्शी के लेख के माध्यम से नारी सशक्तिकरण के प्रभावी चित्रण की सराहना की।

फिल्में समाज का दर्पण

लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सौरभ मालवीय ने कहा कि फिल्में समाज का दर्पण होती हैं और यह पुस्तक सवा सौ वर्षों की फिल्मी यात्रा का समग्र परिदृश्य प्रस्तुत करती है। वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक श्रीधर अग्निहोत्री ने कहा कि यह पुस्तक जहाँ एक ओर चमकते सितारों की कहानी कहती है, वहीं दूसरी ओर गुमनाम कलाकारों के योगदान को भी सम्मानपूर्वक सामने लाती है।

संपादक डॉ. राखी बख्शी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रवाद के बिना फिल्मों की कहानी अधूरी है और ऐसी फिल्मों ने समय-समय पर देश को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार रेणु मिश्रा, यूपी मेट्रो के महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा, फिल्म अभिनेता चंद्रभूषण सिंह, शिल्पायन प्रकाशन के उमेश शर्मा, समाजसेवी शलिनी मिश्रा, जरीन अंसारी, जसपाल सिंह, मोहम्मद अकबर सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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