
US Israel Iran Conflict : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान को लेकर जारी सैन्य अभियान के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन NATO की कड़ी आलोचना की है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में कहा कि NATO के अधिकांश सहयोगी देश अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका को उनकी मदद की कोई जरूरत नहीं है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि भले ही NATO देश इस अभियान से दूरी बना रहे हों, लेकिन वे इस बात से सहमत हैं कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य सफलता हासिल की है, जिसके बाद अब NATO की सहायता की आवश्यकता नहीं रही। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका पहले भी अपने दम पर कार्रवाई करने में सक्षम रहा है।
अपने बयान में उन्होंने जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का जिक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा के मामलों में अमेरिका अक्सर अकेले ही जिम्मेदारी निभाता है।
NATO को बताया ‘वन-वे स्ट्रीट’
ट्रंप ने NATO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे “वन-वे स्ट्रीट” करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका हर साल अरबों डॉलर खर्च कर सहयोगी देशों की सुरक्षा करता है, लेकिन जब जरूरत होती है तो वे देश साथ नहीं देते।
ट्रंप ने कहा कि NATO सहयोगियों के इस रुख से उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई, क्योंकि वे पहले से ही इस संगठन की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं।
ईरान की सैन्य क्षमता पर बड़ा दावा
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं को खत्म कर दिया गया है, जिससे भविष्य में वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा कम हो जाएगा।
हालांकि, ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।



