
सोनभद्र। जनपद में पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने में युवा कारीगर दीपक बसोर की कला आज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है। बांस से बने आकर्षक और उपयोगी हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के माध्यम से दीपक बसोर न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति को भी आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।
दीपक बसोर बांस से विभिन्न प्रकार के सजावटी और उपयोगी सामान जैसे टोकरी, फूलदान, लैंप शेड, फ्लावर पॉट, लालटेन, क्लेचर, मिरर, नाव, बैलगाड़ी, फूड बास्केट, ट्रे, चटाई, बुके होल्डर, घरेलू सजावट की वस्तुएं और अन्य कलात्मक उत्पाद तैयार करते हैं। उनके बनाए उत्पाद अपनी सुंदरता, मजबूती और पारंपरिक शिल्पकला की झलक के कारण लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं।
ग्रामीण परिवेश में रहकर दीपक बसोर ने अपनी मेहनत, लगन और हुनर के दम पर बांस शिल्प को एक नई दिशा दी है। उनके इस कार्य से न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है, बल्कि आसपास के लोगों को भी रोजगार और प्रेरणा मिल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपक बसोर जैसे कारीगरों की वजह से पारंपरिक बांस शिल्प की पहचान आज भी जीवित है और नई पीढ़ी को इससे जुड़ने की प्रेरणा मिल रही है।
दीपक बसोर का मानना है कि यदि सरकार और समाज का सहयोग मिले तो बांस से बने हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई जा सकती है।
उनकी यह कला न केवल पारंपरिक शिल्प की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ा रही है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार करने में योगदान दे रही है।
संजय द्विवेदी की खास रिपोर्ट



