
Mumbai Terror Attack : 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में भारत ने पाकिस्तान में मौजूद फरार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। मुंबई पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी समेत छह आरोपियों को उद्घोषणा आदेश इंटरपोल के जरिए तामील कराने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) से संपर्क किया है। इस कदम से आरोपियों के खिलाफ ट्रायल इन एब्सेंटिया (आरोपी की गैरमौजूदगी में मुकदमा) का रास्ता साफ होने की दिशा में कार्रवाई आगे बढ़ी है।
26/11 केस के छह आरोपी कौन हैं?
मुंबई पुलिस के मुताबिक, मामले में पाकिस्तान में मौजूद छह वांछित आरोपियों में हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, लश्कर का ऑपरेशन कमांडर साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ अबू कहाफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों की भूमिका 26/11 हमले के दौरान पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब और अमेरिकी आतंकी आरोपी से सरकारी गवाह बने डेविड कोलमैन हेडली के बयानों और सबूतों में सामने आई है। सभी छह आरोपी पाकिस्तानी नागरिक हैं और फिलहाल भारतीय न्यायिक प्रक्रिया की पहुंच से बाहर हैं।
इंटरपोल के जरिए भेजा जाएगा आदेश
मामले के विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने शुक्रवार को अदालत में अंतरिम रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि जुलाई में जारी उद्घोषणा आदेश को पाकिस्तान में रह रहे आरोपियों तक पहुंचाने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिखा गया है।
निकम के अनुसार, गृह मंत्रालय ने 3 अगस्त को आदेश प्राप्त होने की पुष्टि की थी और आगे की स्थिति रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा है।
BNSS की धारा 356 के तहत ट्रायल की तैयारी
मुंबई पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत मुकदमा चलाने की मांग की है। यह प्रावधान उन घोषित अपराधियों के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की अनुमति देता है, जो गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हैं और जिनकी तत्काल गिरफ्तारी की संभावना नहीं है।
हालांकि, ट्रायल इन एब्सेंटिया शुरू करने से पहले अदालत को यह संतुष्ट होना जरूरी है कि आरोपी जानबूझकर गिरफ्तारी और मुकदमे से बच रहा है। कानून में आरोपी के अधिकारों की सुरक्षा के लिए भी प्रावधान हैं, जिसमें जरूरत पड़ने पर राज्य की ओर से वकील उपलब्ध कराने की व्यवस्था शामिल है।
26/11 हमले में गई थी 166 लोगों की जान
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी। हमलावरों ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ताज महल पैलेस होटल, ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस समेत कई स्थानों को निशाना बनाया था। मुंबई में यह आतंकी हमला 60 घंटे से अधिक समय तक चला था।
हमले में शामिल 10 आतंकियों में से अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। अदालत ने उसे दोषी ठहराया और 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी गई।
14 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
विशेष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। उस दिन अभियोजन पक्ष से फरार आरोपियों तक उद्घोषणा आदेश पहुंचाने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति रिपोर्ट पेश किए जाने की उम्मीद है।



