
Women Reservation Bill: संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो चुका है। इस बार सरकार की नजर दो बड़े विधेयकों पर टिकी है। इनमें महिला आरक्षण और परिसीमन बिल शामिल हैं।
केंद्र सरकार इन दोनों विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए नए राजनीतिक समीकरणों पर भरोसा कर रही है। पिछले सत्र में आवश्यक समर्थन नहीं मिलने से सरकार को झटका लगा था। इसके बाद संख्या बल बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी गईं।
महिला आरक्षण कानून पहले ही संसद से पारित हो चुका है। हालांकि इसके पूर्ण क्रियान्वयन को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। यही वजह है कि परिसीमन बिल को सरकार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
सरकार का दावा है कि नए परिसीमन से किसी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। गृह मंत्री अमित शाह पहले भी कह चुके हैं कि महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की दिशा में परिसीमन अहम कदम है।
दक्षिण भारत के कुछ दलों ने परिसीमन को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सीटों के पुनर्वितरण से क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से सरकार लगातार क्षेत्रीय दलों से संवाद कर रही है।
डीएमके ने महिला आरक्षण का समर्थन किया है। लेकिन पार्टी ने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर अधिक स्पष्टता और सुरक्षा उपायों की मांग की है।
वहीं कांग्रेस और कई विपक्षी दल सरकार के प्रस्तावों पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि परिसीमन को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर पहले भी संसद में तीखी बहस हो चुकी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार बदले हुए गठबंधन समीकरण सरकार के पक्ष में जा सकते हैं। कई क्षेत्रीय दलों का रुख पहले की तुलना में नरम दिखाई दे रहा है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इन विधेयकों को इसी सत्र में मतदान के लिए लाएगी या नहीं। मॉनसून सत्र के घोषित एजेंडे में इनका नाम प्रमुख विधेयकों की सूची में शामिल नहीं है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इन पर लगातार चर्चा जारी है।
आने वाले दिनों में संसद के भीतर होने वाली बहस और राजनीतिक बातचीत तय करेगी कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का भविष्य क्या होगा। फिलहाल दोनों मुद्दों पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।



