Chalo Sansad March:
संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च का ऐलान किया है।
इस आंदोलन को नीट पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दों से जोड़ा जा रहा है। रविवार शाम से ही बड़ी संख्या में छात्र, अभ्यर्थी और अभिभावक जंतर-मंतर पर पहुंचने लगे थे।
CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने मार्च से पहले बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि संसद जाने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता। दिपके ने दावा किया कि देशभर से लोग इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से चल रहा आंदोलन लोकतंत्र की आवाज बन चुका है। उनके अनुसार यह देश के हालिया वर्षों का सबसे बड़ा जन आंदोलन साबित हो सकता है।
वहीं दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। जंतर-मंतर, संसद मार्ग, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
पुलिस ने थ्री-टियर सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। इसमें दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई टीमें शामिल हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट्स भी तैयार रखी गई हैं।
नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके तहत बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध रहेगा।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संसद मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से कानून का पालन करने और अनधिकृत मार्च से दूर रहने की अपील की है।
CJP की मुख्य मांगों में नीट पेपर लीक की निष्पक्ष जांच शामिल है। पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रही है।
इसके अलावा संगठन बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में देरी और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर भी सरकार को घेर रहा है।
इस बीच सोनम वांगचुक का मुद्दा भी आंदोलन के केंद्र में बना हुआ है। वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अस्पताल बदलने की मांग को लेकर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर की है।
उधर जंतर-मंतर पर 23 दिनों से आमरण अनशन कर रहे AISA के तीन छात्रों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक हस्तियों की अपील के बाद यह फैसला लिया गया।
अब सभी की नजर CJP के प्रस्तावित संसद मार्च पर है। देखना होगा कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच आगे क्या स्थिति बनती है।



