
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में एक बार फिर राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय में हुई कथित तोड़फोड़ की घटना ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। टीएमसी ने इस पूरे हमले के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया है, और अभिषेक बनर्जी ने खुद सामने आकर इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है।
तड़के साढ़े चार बजे हुई घटना
आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के अनुसार, यह पूरी घटना आज सुबह करीब साढ़े चार बजे की है, जब कुछ लोग जबरन कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी दफ्तर में घुस आए। पार्टी का दावा है कि ये लोग भाजपा से जुड़े गुंडे थे, जिन्होंने पूरे कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ मचाई और वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की।
इतना ही नहीं, हमलावर सिर्फ तोड़फोड़ करके नहीं रुके — वे दफ्तर से एयर प्यूरीफायर, प्रिंटर और टेलीविजन जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी उठाकर अपने साथ ले गए।
हथियारों से लैस थे हमलावर, फोन भी छीने
अभिषेक बनर्जी ने इस पूरे वाकये की जानकारी देते हुए बताया कि हमला करने आए लोग हथियार लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि इन लोगों ने न सिर्फ पार्टी कर्मचारियों के साथ मारपीट की, बल्कि उनके फोन भी छीन लिए और दफ्तर में रखा तमाम इलेक्ट्रॉनिक सामान तोड़ डाला।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद पुलिस की प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही। बनर्जी के मुताबिक, दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों और वकीलों ने फोन कॉल और ईमेल के जरिए तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद करीब दो घंटे तक कोई पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। उन्होंने साफ मांग की है कि इस हमले में शामिल हर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
राज्यपाल, गृह मंत्री और PMO से सीधा सवाल
घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने अपने एक्स हैंडल पर इसका वीडियो शेयर किया और इसके साथ तीखे सवाल भी दागे। उन्होंने लिखा कि आज सुबह-सुबह भाजपा ने उनके पार्टी दफ्तर के साथ यही किया है, और फिर सीधे पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल के राज्यपाल इस पर कोई कार्रवाई करेंगे, क्या केंद्रीय गृह मंत्री इसे संज्ञान में लेंगे, या फिर प्रधानमंत्री कार्यालय इस पर कोई कदम उठाएगा — या फिर सब इसे यूं ही नजरअंदाज कर देंगे।
‘यह लोकतंत्र नहीं, राजनीतिक गुंडागर्दी है’
अपने पोस्ट में आगे बढ़ते हुए अभिषेक बनर्जी ने न्यायपालिका से भी सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि कलकत्ता हाई कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले और पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए।
इसी क्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर बैठे सुवेंदु अधिकारी पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने पूछा कि आखिर तृणमूल कांग्रेस और खुद उनसे इतना डर क्यों है कि इस तरह डराने-धमकाने का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। बनर्जी ने आगे कहा कि अगर बंगाल में विपक्ष के साथ हिंसा, तोड़फोड़ और धमकी का यही तरीका अपनाया जाता रहेगा, तो मुख्यमंत्री को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचता, और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके शब्दों में, यह लोकतंत्र नहीं बल्कि राजनीतिक गुंडागर्दी है।
‘कुछ भी भुलाया नहीं जाएगा’
टीएमसी सांसद का गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को शर्म आनी चाहिए, और साथ ही उन लोगों को भी जो चुप्पी साधे रहने का रास्ता चुनते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ऐसी हर हरकत को याद रखा जाएगा — चाहे वह कोई हमला हो, डराने-धमकाने की कोशिश हो या फिर सत्ता का किसी भी तरह का दुरुपयोग, कुछ भी भुलाया नहीं जाएगा।
आगे क्या
फिलहाल इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं टीएमसी ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्रालय और अदालत तक ले जाने की तैयारी में है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस घटना पर प्रशासन और पुलिस की तरफ से क्या कार्रवाई होती है।



