Trump Netanyahu Meeting: ईरान पर 3 बड़े ऑप्शन! ट्रंप-नेतन्याहू की बंद कमरे में 90 मिनट की बैठक में क्या बनी रणनीति?

Trump Netanyahu Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में करीब 90 मिनट तक अहम बैठक हुई। बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा ईरान रहा। दोनों नेताओं ने तेहरान पर दबाव बढ़ाने के लिए कई विकल्पों पर चर्चा की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि किसी अंतिम फैसले की घोषणा नहीं की गई है।

पहला विकल्प: नई परमाणु डील

बैठक में सबसे पहले कूटनीतिक रास्ते पर चर्चा हुई। अमेरिका अब भी ऐसी व्यवस्था चाहता है जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी रखी जा सके।

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यदि ईरान समझौते के लिए तैयार होता है तो क्षेत्र में तनाव कम किया जा सकता है। हालांकि इजराइल इस विकल्प को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिख रहा।

दूसरा विकल्प: आर्थिक दबाव और नाकेबंदी

दूसरा बड़ा विकल्प ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाना है। इसमें प्रतिबंधों को कड़ा करना, व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना शामिल है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के नए तरीकों पर भी चर्चा हुई। उद्देश्य यह है कि बिना बड़े युद्ध के तेहरान को झुकने पर मजबूर किया जाए।

तीसरा विकल्प: सैन्य कार्रवाई

बैठक में सैन्य विकल्प भी चर्चा का हिस्सा रहा। इजराइली अधिकारियों के अनुसार दोनों नेताओं ने सभी संभावित सैन्य विकल्पों की समीक्षा की, जिनमें ईरान के रणनीतिक और परमाणु ठिकानों पर हमले की संभावना भी शामिल है।

हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार नेतन्याहू ने तत्काल सैन्य कार्रवाई को प्राथमिक विकल्प के रूप में आगे नहीं बढ़ाया। फिर भी “सभी विकल्प खुले हैं” की नीति बरकरार रखी गई है।

दोनों नेताओं में मतभेद भी?

सूत्रों के मुताबिक ट्रंप और नेतन्याहू का लक्ष्य समान है, लेकिन तरीके को लेकर कुछ मतभेद मौजूद हैं।

ट्रंप कूटनीति और दबाव दोनों का मिश्रण चाहते हैं, जबकि इजराइल ईरान की परमाणु क्षमताओं को लेकर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने के पक्ष में माना जाता है।

मिडिल ईस्ट पर क्या होगा असर?

बैठक ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में पहले से तनाव बना हुआ है। हाल के महीनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और तेल अवीव के अगले कदम मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजर ट्रंप और नेतन्याहू की अगली घोषणा पर टिकी हुई है।

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