आन्दोलन भरा रहा सप्ताह का पहला दिन

The first day of the week was marked by protests

आज के दौर में जहां देखों वहीं आन्दोलन, धरना प्रदर्शन और पुतला दहन किया जा रहा है। इस आन्दोलन के दौर में कहीं छात्र गिरफ्तार हो रहें, तो कहीं अधिवक्ताओं पर कचहरी में लूट का आरोप लगा उन पर मुकदमा किया जा रहा है, तो कहीं पर अधिवक्ताओं द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंका जा रहा हैं। सप्ताह का पहला दिन भी इसी तरह रहा।

लूट के आरोप में अधिवक्ताओं पर मुकदमा

चार अधिवक्ताओं पर कचहरी के भीतर लू्रट का आरोप लगा कर उन पर कर्नलगंज इंस्पेक्टर द्वारा लूट का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इसके विरोध में अधिवक्ताओं ने कचहरी मार्ग पर चक्का जाम कर दिया कर दिया, जिस वजह से लोगों को आने जाने में समस्या का सामना करना पड़ा। अधिवक्ताओं का कहना है कि आए दिन पुलिस अधिवक्ताओं किसी न किसी मामले में जबरन मुकदमा दर्ज करती है। इसी के साथ अधिवक्ताओं ने कर्नलगंज इंस्पेक्टर पर आरोप लगाया कि आठ हजार रूपए लेकर मुकदमा लिख दिया। इस पर जब कर्नलगंज इंस्पेक्टर ज्ञानेश्वर मिश्रा से बात कि गई, तो उन्होंने बताया कि दो अधिवक्ताओं के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। जिस वजह से दोनों पक्षों ने आपस में मार पीटाई की और उसके बाद मुकदमा दर्ज कराने के लिए आ गये। मुकदमा दोनों तरफ से दर्ज कराया गया। धरना प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहें।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग कर रहे छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए छात्रों ने बैंक रोड से आज़ाद प्रतिमा तक पैदल मार्च करने जा रहे थे। लेकिन कार्यक्रम के पहले ही बड़ी संख्या में छात्रनेताओं और छात्रों को छात्रावास और कमरे से पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया। छात्रों और छात्रनेताओं को गिरफ्तार कर पुलिस उन्हें अलग अलग स्थानों पर लें गई। छात्रों ने बताया कि जो छात्र बैंक रोड पर थे उनको गिरफ्तार करके पुलिस लाइन लें जाया गया। छात्रनेता राहुल पटेल,अनुराग यादव, प्रियांशु को पुलिस ने छात्रावास से गिरफ्तार करके किसी अज्ञात जगह भेज दिया। लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की रक्षा और जनता के मताधिकार की सुरक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा। जनता की आवाज बुलंद है। जब तक वह इस्तीफा नहीं दे देते तब तक हम प्रदर्शन करते रहेंगे।

छात्रों को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस

 

 

 

 

 

 

                                                                                                           

 

अधिवक्ताओं ने फूंका ज्ञानेश कुमार का पुतला
सुभाष चौराहे पर जनपद न्यायालय के अधिवक्ताओं ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में प्रतीकात्मक पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। अधिवक्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची में अनियमितताओं तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास से जुड़े सवालों को उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनरत अधिवक्ताओं का कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि है। मतदाता सूची के संशोधन एवं निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष और संतोषजनक समाधान होना चाहिए, ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम जनता का विश्वास कायम रहे। अधिवक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं, तो उनका जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए। जनता के मताधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा का संकल्प व्यक्त किया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उठाए गए सवालों का उचित समाधान नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंकते अधिवक्ता

 

 

 

 

 

रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी

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