Nithari Case: ‘उसे कई राज पता थे, इसलिए हमेशा के लिए कर दिया खामोश?’, सुरेंद्र कोली की मौत पर निठारी पीड़ितों ने उठाए सवाल

निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद पीड़ित परिवारों ने आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए गहराई से जांच की मांग की है।

Nithari Case: नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की मौत ने करीब दो दशक पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। सुरेंद्र कोली शुक्रवार को हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान के अंदर मृत मिला। पुलिस के मुताबिक, उसके गले में फंदा था और रस्सी का दूसरा हिस्सा दुकान की छत के पंखे से जुड़ा था। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने शुरुआती तौर पर आत्महत्या की आशंका जताई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

कोली की मौत के बाद निठारी कांड के पीड़ित परिवारों ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल खड़े किए हैं। एक पीड़ित के पिता झब्बू लाल ने आरोप लगाया कि सुरेंद्र कोली की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या हो सकती है। उन्होंने मामले की गहराई से जांच की मांग की है। हालांकि, उनके लगाए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अभी तक पुलिस की जांच में हत्या की पुष्टि नहीं हुई है।

पीड़ित परिवार ने क्यों उठाए सवाल?

निठारी कांड के पीड़ित परिवारों का कहना है कि सुरेंद्र कोली इस मामले से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां जानता था। इसी वजह से उसकी मौत को लेकर उन्हें संदेह है। पीड़ित परिवारों ने आशंका जताई कि अगर कोली किसी महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा करने वाला था तो उसे रास्ते से हटाया जा सकता है।

हालांकि यह सिर्फ पीड़ित परिवारों की आशंका और आरोप हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसा कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे यह साबित हो कि कोली की हत्या की गई थी। फिलहाल जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।

हरिद्वार में चाय की दुकान चला रहा था कोली

सुरेंद्र कोली करीब दो दशक जेल में रहने के बाद पिछले साल जेल से बाहर आया था। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी मामले में उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामले में भी उसे बरी कर दिया था। इसके बाद उसने हरिद्वार में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश की।

पुलिस के मुताबिक, कोली हरिद्वार के भूपतवाला और सप्तसरोवर इलाके में चाय की दुकान चला रहा था। उसकी मौत इसी दुकान के अंदर हुई। पुलिस को शव फंदे से लटका मिला। मौके पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि परिवार को सूचना दे दी गई है और मामले की जांच की जा रही है।

रिपोर्टों के मुताबिक, कोली ने हरिद्वार में अपनी पहचान बदलकर रहने की कोशिश की थी और कुछ समय पहले ही चाय की दुकान शुरू की थी। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार वह वहां अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहा था।

निठारी कांड में कोली और पंढेर पर लगे थे गंभीर आरोप

निठारी कांड दिसंबर 2006 में सामने आया था। नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद देशभर में सनसनी फैल गई थी। यह कोठी कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की थी और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था।

जांच के दौरान कोली और पंढेर पर कई बच्चों और महिलाओं के अपहरण, हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप लगाए गए। बाद में सीबीआई ने मामले की जांच की। दोनों आरोपियों के खिलाफ कई अलग-अलग मामले चले और निचली अदालतों में कोली को कई मामलों में मौत की सजा भी सुनाई गई थी।

लेकिन वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया में तस्वीर बदलती गई। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2023 में कोली को कई मामलों में बरी कर दिया था। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मामले में भी उसे बरी कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा था कि गंभीर संदेह के बावजूद दोष साबित करने के लिए कानूनी मानकों के मुताबिक विश्वसनीय और स्वीकार्य सबूत जरूरी हैं। कोर्ट ने जांच की कमियों का भी उल्लेख किया था।

पंढेर को लेकर भी पीड़ित परिवारों के सवाल

सुरेंद्र कोली की मौत के बाद कुछ पीड़ित परिवारों ने एक बार फिर मोनिंदर सिंह पंढेर की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। एक पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि कोली को निठारी मामले से जुड़े कई राज पता थे और संभव है कि इन्हीं वजहों से उसकी हत्या की गई हो।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये पीड़ित परिवारों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कोली की मौत के मामले में पुलिस ने अभी तक हत्या की पुष्टि नहीं की है। पुलिस घटनास्थल की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

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अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज

सुरेंद्र कोली की मौत के मामले में फिलहाल सबसे अहम कड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट होगी। पुलिस ने कहा है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट के बाद मौत की परिस्थितियों के बारे में अधिक स्पष्टता आएगी।

एक तरफ पुलिस शुरुआती तौर पर आत्महत्या की आशंका जता रही है, वहीं दूसरी ओर निठारी कांड के पीड़ित परिवार इसे संदिग्ध मानकर विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। ऐसे में पोस्टमार्टम, फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से जुटाए गए सबूत यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि सुरेंद्र कोली की मौत वास्तव में आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

करीब 20 साल पुराने निठारी कांड में सुरेंद्र कोली की भूमिका को लेकर अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई चली थी और अंततः वह सभी मामलों में बरी हो गया था। अब उसकी मौत ने उसी मामले से जुड़े पीड़ित परिवारों के पुराने सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

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