National News: आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘आंखें नहीं मूंद सकते’; जानिए फैसले की 5 बड़ी बातें

डॉग बाइट और रेबीज मामलों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक प्लेस से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश को बरकरार रखा, राज्यों को ABC नियम लागू करने की नसीहत।

National News: देश में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और रैबीज से हो रही मौतों पर Supreme Court of India ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें डॉग लवर्स की ओर से पहले दिए गए आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

1. ABC प्रोग्राम सही तरीके से लागू नहीं हुआ: सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि Animal Birth Control यानी ABC प्रोग्राम को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। अगर राज्य सरकारें नियमों का पालन करतीं तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते।

कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करें ताकि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित हो सके।

2. डॉग बाइट की घटनाएं गंभीर समस्या बन चुकी हैं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और यह अब गंभीर सार्वजनिक समस्या बन चुकी है।

कोर्ट ने राजस्थान के गंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा के आंकड़ों का जिक्र करते हुए चिंता जताई। इसके अलावा तमिलनाडु और दिल्ली से भी डॉग बाइट के कई मामले सामने आए हैं।

कोर्ट ने बताया कि दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर जनवरी से अब तक 31 डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

3. ‘आंखें नहीं मूंद सकते’

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों और बुजुर्गों पर हो रहे हमलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं शहरी प्रशासन और कानून व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को कमजोर करती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—
“हम ऐसी स्थिति से आंखें नहीं मूंद सकते। संविधान सभी नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है।”

4. खतरनाक और बीमार कुत्तों को मारने पर विचार

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक आवारा कुत्तों को मारने के विकल्प पर भी विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि कोर्ट ने यह साफ किया कि इस तरह के कदम कानून और तय नियमों के तहत ही उठाए जाएं।

5. आदेश नहीं माना तो अवमानना मानी जाएगी

सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त और 7 नवंबर 2025 को जारी अपने पुराने आदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि अभी तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन आदेशों का पालन नहीं करते हैं, तो इसे अदालत की अवमानना की तरह देखा जाएगा।

क्यों अहम है यह फैसला?

देश के कई शहरों में आवारा कुत्तों का मुद्दा लगातार बड़ा होता जा रहा है। डॉग बाइट, रेबीज संक्रमण और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर लोग चिंता जता रहे हैं।

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य सरकारों और नगर निकायों पर दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और आम लोगों को राहत मिलती है या नहीं।

written by : ekta verma

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