Sonbhadra News: नगर पंचायतों में पेटी संविदा प्रथा पर उठे सवाल, विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर चिंता

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बाहरी संविदाकार टेंडर लेने के बाद कार्य पेटी संविदाकारों को सौंप रहे हैं, जिससे गुणवत्ता, समयबद्धता और भुगतान व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

Sonbhadra News: सोनभद्र जिले की नगर पंचायतों में विकास कार्यों के निष्पादन को लेकर पेटी संविदा (सब-कॉन्ट्रैक्ट) व्यवस्था एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ बाहरी संविदाकार टेंडर प्राप्त करने के बाद स्वयं कार्य कराने के बजाय उसे पेटी संविदाकारों को सौंप देते हैं। इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मूल संविदाकार टेंडर मिलने के बाद कार्य को कम दर पर दूसरे संविदाकारों से कराने का प्रयास करते हैं। आरोप है कि कई मामलों में उपयुक्त पेटी संविदाकार की तलाश में कार्य शुरू होने में ही देरी हो जाती है, जिससे नगर पंचायतों की विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं और आम जनता को समय पर सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

लोगों का यह भी आरोप है कि कई पेटी संविदाकारों के पास पर्याप्त तकनीकी संसाधन और आवश्यक क्षमता नहीं होती। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरे नहीं होने से परियोजनाओं में विलंब होता है और नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

भुगतान व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कई मामलों में पेटी संविदाकार कार्य पूरा करने के बाद भी समय पर भुगतान नहीं प्राप्त कर पाते। आरोप है कि नगर पंचायत से भुगतान जारी होने के बावजूद मूल संविदाकार उप-संविदाकारों का भुगतान लंबित रखते हैं, जिससे आर्थिक विवाद और तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है।

जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की जानी चाहिए। उनका कहना है कि जिस संविदाकार को टेंडर आवंटित किया गया है, उसी को कार्य का प्रत्यक्ष निष्पादन करना चाहिए और गुणवत्ता से लेकर भुगतान तक की पूरी जिम्मेदारी भी उसी की तय होनी चाहिए।

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स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।

इस संबंध में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वागीश शुक्ला से दूरभाष पर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।

सोनभद्र से संजय द्विवेदी की रिपोर्ट

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