
SIR Controversy: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस भुइयां ने बड़े पैमाने पर लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने को मनमाना बताया। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में उचित प्रक्रिया और संवैधानिक सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।
जस्टिस भुइयां की इस टिप्पणी को विपक्षी दलों ने SIR के खिलाफ अपने तर्क के समर्थन में इस्तेमाल किया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR की प्रक्रिया को कानूनी प्रावधानों के तहत चलाए जाने की बात कहता रहा है। ऐसे में विवाद अब राजनीतिक विरोध के साथ-साथ न्यायिक और संवैधानिक बहस का भी विषय बन गया है।
कांग्रेस ने बुलाई अहम बैठक
SIR और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने आज शाम महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक बुलाई है। बैठक में SIR के मुद्दे पर पार्टी के अगले कदम और राज्यों में अभियान को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
कांग्रेस पहले ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने तथा अपील का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
जयराम रमेश ने CEC पर साधा निशाना
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि इससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे विपक्ष के सवालों को बल मिलता है।
जयराम रमेश ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग दोहराई और आरोप लगाया कि CEC ने अपने संवैधानिक पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। ये कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप हैं।
विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बना जस्टिस भुइयां का बयान
विपक्षी दल SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। जस्टिस भुइयां ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि बड़े पैमाने पर लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित करना गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है। उन्होंने वोटर लिस्ट में बदलाव के लिए उचित प्रक्रिया और कानूनी सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया।
इस टिप्पणी के बाद विपक्ष को चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान को और धार देने का मौका मिला है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल पहले से ही CEC के खिलाफ संसद में कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। विपक्ष की ओर से CEC को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी की खबरें भी पहले सामने आ चुकी हैं।
महुआ मोइत्रा ने की जस्टिस भुइयां की तारीफ
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी जस्टिस भुइयां की टिप्पणी की सराहना की। उन्होंने कहा कि पद पर रहते हुए किसी न्यायाधीश का सत्ता के सामने अपनी बात रखना महत्वपूर्ण है।
महुआ मोइत्रा की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब INDIA ब्लॉक के कई दल SIR और चुनाव आयोग को लेकर एक साथ आवाज उठा रहे हैं।
दिल्ली से मुंबई तक विरोध प्रदर्शन
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और विभिन्न संगठनों का विरोध भी जारी है। दिल्ली में जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद सामने आया है। दिल्ली में एक प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए, जिसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
महाराष्ट्र में भी SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी गतिविधियां तेज हुई हैं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने 4 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त मार्च का नेतृत्व किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस और शरद पवार गुट की NCP के नेता भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने CEC के इस्तीफे और महाराष्ट्र में SIR रद्द करने की मांग उठाई।
AAP कार्यकर्ताओं की हिरासत पर भी विवाद
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान AAP के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात पार्टी की ओर से कही गई।
वहीं बीजेपी ने विपक्षी दलों पर दिल्ली का माहौल खराब करने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इस तरह SIR का मुद्दा अब चुनावी प्रक्रिया से आगे बढ़कर केंद्र और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का विषय बनता जा रहा है।
आज की बैठक और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
SIR विवाद के बीच आज का दिन राजनीतिक और कानूनी दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है। कांग्रेस की बैठक में पार्टी के आगे के आंदोलन और संगठनात्मक रणनीति पर चर्चा होनी है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मामलों पर सुनवाई भी निर्धारित है।
ऐसे में जस्टिस भुइयां की टिप्पणी के बाद विपक्ष की बढ़ी सक्रियता, कांग्रेस की बैठक और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई—इन तीनों घटनाक्रमों पर राजनीतिक और संवैधानिक बहस आगे बढ़ने की संभावना है।
written by Siddhi Srivastava



