
सावन के प्रथम सोमवार को शिव मंदिरों में उमड़ी रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़
संगम तट पर भी बड़ी संख्या में पहुंचे स्नानार्थी
सावन के पावन महीने के प्रथम सोमवार को शहर के प्रसिद्ध शिवालय भक्तों की भीड़ और भोले के जयकारों से गूंज उठे। जहां एक ओर कुंवारी कन्याएं गुणवान पति की कामना लेकर, तो वहीं महिलाएं अपने परिवार के सुख समृद्धि के लिए दर्शन को पहुंची। भक्तों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की मौजूदगी भी देखने को मिली। शिवालयों में भक्तों ने भगवान के दर्शन किये ही इसके साथ साथ घरों पर भी भगवान शंकर का नाना द्रव्यों से रूद्राभिषेक कर मिष्ठान का भोग लगाया। हर शिव मंदिर के दर्शन करने की अपनी मान्यता है। किस मंदिर का क्या महत्व है पढ़िए आगे की रिपोर्ट में….
भगवान मनकामेश्वर मंदिर
सरस्वती घाट यमुना के तट पर स्थित पर भगवान शिव का मनकामेंश्वर मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों की सारी मनोकामना पूर्ण होती है। आचार्य उदित नारायण त्रिपाठी बताते है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के द्वारा कि गई थी। इसी के साथ उन्होंने बताया कि इस मंदिर का वर्णन शिव पुराण में भी देखने को मिलता है।
तक्षक तीर्थ अर्थात बड़ा शिवाला
यह मंदिर यमुना के तट, दरियाबाद मोहल्ले में स्थित हैं। मंदिर के पुजारी रविशंकर मिश्रा बताते है कि इस मंदिर का विवरण पद्म पुराण के सांतवें अध्याय में मिलता हैं। मंदिर की स्थापना राजा परीक्षित के द्वारा कि गई थी। इसी के साथ उन्होंने बताया कि इस मंदिर में पांच शिव लिंग स्थापित किये गये हैं। इनके दर्शन मात्र से ही सारे पाप कट जाते है।
गंगा किनारें स्थिति है नागवासुकी मंदिर
गंगा किनारें स्थित नागवासुकी मंदिर पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान विष्णु के द्वारा मानी जाती है। इसके बाद मंदिर का वर्तमान स्वरूप जो है इसे 18 वीं शताब्दी में मराठा शासक श्रीधर भोंसलें के द्वारा बनाया गया हैं। इस मंदिर में बराबर भक्तों का तांता लगा रहता है। सावने पावन महीने में भक्तों की लंबी कतारें लगती ही है। इसके साथ साथ यहां पर कालसर्प दोष की निवारण पूजा भी होती है।
रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी



