
पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। खास बात यह है कि अब राज्य की सियासत में पड़ोसी राज्यों के बड़े नेताओं की सक्रियता भी बढ़ गई है। भाजपा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पंजाब में सक्रिय किया है, जबकि कांग्रेस ने राजस्थान के सचिन पायलट को प्रदेश का प्रभारी बनाकर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी है। आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता भी लगातार पंजाब के मुद्दों पर सक्रिय नजर आ रहे हैं।
पड़ोसी राज्यों के इन नेताओं की बढ़ती मौजूदगी से पंजाब में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सभी दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ चुनावी समीकरण साधने में जुटे हैं।
बॉर्डर सीटों पर भाजपा का फोकस
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पिछले कुछ समय से पंजाब के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वह भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने के अलावा कई स्थानीय कार्यक्रमों में भी हिस्सा ले रहे हैं। उनकी सक्रियता को भाजपा की उस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें हरियाणा से सटे पंजाब के विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला, संगरूर और लुधियाना जैसे जिलों के कई विधानसभा क्षेत्र हरियाणा की सीमा से जुड़े हैं। भाजपा इन इलाकों में संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाकर राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी को उम्मीद है कि इन क्षेत्रों में उसकी सक्रियता चुनावी नतीजों में बदलाव ला सकती है।
नायब सैनी पंजाब भाजपा के लिए कई नए चेहरों को जोड़ने की कोशिशों में भी सक्रिय रहे हैं। वह तख्त श्री केसगढ़ साहिब में मत्था टेक चुके हैं और श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह से भी मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा वह सरपंचों और स्थानीय नेताओं के साथ भी संवाद कर चुके हैं।
राजस्थान से आए सतीश पूनिया भी संभाल रहे मोर्चा
पंजाब भाजपा के नए प्रभारी सतीश पूनिया ने भी संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। राजस्थान से आने वाले पूनिया लगातार पार्टी नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं और पंजाब में भाजपा की गतिविधियों को गति देने पर जोर दे रहे हैं।
नशे के मुद्दे पर भाजपा की प्रस्तावित यात्रा को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। पंजाब में नशा एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है और भाजपा इसे लेकर आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कांग्रेस के लिए पायलट के सामने बड़ी चुनौती
दूसरी तरफ कांग्रेस ने राजस्थान के नेता सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी देकर पार्टी के भीतर गुटबाजी खत्म करने की कोशिश की है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि चुनाव से पहले संगठन के अलग-अलग धड़ों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए और पार्टी एकजुट होकर सरकार को घेर सके।
सचिन पायलट 15 सितंबर को पंजाब के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। इस दौरान वह चंडीगढ़ में कांग्रेस के प्रस्तावित प्रदर्शन का नेतृत्व भी करेंगे। कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए पंजाब में नशे के मुद्दे पर भगवंत मान सरकार को घेरने की तैयारी में है।
हाल ही में गुलजार सिंह की मौत के मामले को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। पायलट ने पंजाब का प्रभारी बनने के बाद राज्य के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
AAP ने भी बढ़ाई अपनी राजनीतिक सक्रियता
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी भी विपक्षी दलों की बढ़ती गतिविधियों के बीच लगातार सक्रिय है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पंजाब में धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। आने वाले दिनों में भी उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा भी पंजाब से जुड़े मुद्दों पर लगातार बयान दे रहे हैं। हाल ही में एसआईआर की सूची से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटने के मुद्दे पर ढांडा ने केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा था।
चुनावी तैयारी ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
पंजाब में फिलहाल तीनों प्रमुख राजनीतिक खेमे अपने-अपने तरीके से जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा पड़ोसी राज्य हरियाणा के मुख्यमंत्री और राजस्थान के प्रभारी के जरिए संगठन विस्तार पर जोर दे रही है। कांग्रेस ने सचिन पायलट को जिम्मेदारी देकर अंदरूनी खींचतान कम करने की कोशिश शुरू की है, जबकि आम आदमी पार्टी अपने मौजूदा आधार को मजबूत रखने के साथ विपक्ष पर हमलावर है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या बाहरी राज्यों के अनुभवी नेताओं की सक्रियता पंजाब में पार्टियों के लिए चुनावी फायदा लेकर आएगी? और खास तौर पर क्या सचिन पायलट कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी को चुनाव से पहले नियंत्रित कर पाएंगे? इन सवालों का जवाब आने वाले महीनों में पंजाब की सियासत की दिशा तय कर सकता है।



