
Pratapgarh News:भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पद्मा एकादशी के अवसर पर रामानुज आश्रम के धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडेय अनिरुद्ध रामानुज दास ने श्रद्धालुओं को एकादशी व्रत के महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पद्मा एकादशी 22 सितंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी।
धर्माचार्य ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने राजा युधिष्ठिर को पद्मा एकादशी का महत्व बताते हुए कहा था कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान हृषीकेश का पूजन और व्रत करना विशेष फलदायी माना गया है।
उन्होंने पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि सतयुग में राजा मांधाता अत्यंत प्रतापी और प्रजा का पालन करने वाले शासक थे। उनके राज्य में सभी लोग सुखी थे, लेकिन एक समय राज्य में भीषण अकाल पड़ गया। वर्षा न होने से प्रजा परेशान हो गई और राजा से समस्या के समाधान की गुहार लगाई।
प्रजा की समस्या का समाधान खोजने के लिए राजा मांधाता कुछ लोगों के साथ जंगल की ओर गए। वहां उन्हें ब्रह्मा जी के पुत्र अंगिरा ऋषि के दर्शन हुए। राजा ने ऋषि को प्रणाम कर राज्य में पड़े अकाल और वर्षा न होने की समस्या बताई। अंगिरा ऋषि ने राजा को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
धर्माचार्य के अनुसार, राजा मांधाता ने अपने परिजनों और प्रजा के साथ पद्मा एकादशी का व्रत किया। इसके बाद राज्य में अच्छी वर्षा हुई, खेत हरे-भरे हो गए और प्रजा फिर से खुशहाल हो गई।
उन्होंने बताया कि पद्मा एकादशी के दिन जल से भरा घड़ा वस्त्र से ढककर दही और चावल के साथ ब्राह्मण को दान करने की परंपरा है। इसके अलावा छाता और जूता दान करने का भी उल्लेख मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भगवान का पूजन करने की अपील की।
धर्माचार्य ने कहा कि पद्मा एकादशी की कथा के श्रवण और पाठ से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को पद्मा एकादशी की शुभकामनाएं देते हुए मंगलकामना की।
पारण का समय: धर्माचार्य के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण बुधवार को प्रातः 8:13 बजे तक अथवा 10:37 बजे से दोपहर 1:01 बजे तक किया जा सकता है।
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रिपोर्ट : उमेश पाण्डेय, जिला संवाददाता, यूनाइटेड भारत



