
Politics over RSS intensifies:कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा आरएसएस के पंजीकरण की मांग उठाए जाने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी संगठन की पहचान केवल उसके कानूनी पंजीकरण से तय नहीं होती।
बीएल संतोष शनिवार को बेंगलुरु में आयोजित ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां उन्होंने आरएसएस की भूमिका, देश के विभाजन, स्वतंत्रता आंदोलन और अखंड भारत की अवधारणा से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।
पंजीकरण के सवाल पर बीएल संतोष का जवाब
बीएल संतोष ने कहा कि आरएसएस विभाजन के समय भी औपचारिक तौर पर पंजीकृत संस्था नहीं था और वर्तमान में भी संगठन अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि संघ का काम उसके कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों के सहयोग से आगे बढ़ता है।
उन्होंने विभाजन के समय आरएसएस कार्यकर्ताओं की भूमिका का भी उल्लेख किया और दावा किया कि उस दौर में संगठन से जुड़े लोगों ने प्रभावित लोगों की सहायता की थी।
आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों के योगदान का जिक्र
कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए संतोष ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के पीछे अनेक लोगों का संघर्ष और बलिदान रहा। उन्होंने मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु समेत कई क्रांतिकारियों को याद किया।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी को केवल एक घटना के रूप में देखने के बजाय उसके पीछे हुए लंबे संघर्ष और बलिदान को भी समझना चाहिए।
हिंदू आबादी को लेकर विवादित टिप्पणी
बीएल संतोष ने देश की जनसांख्यिकी और हिंदू आबादी के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी का अनुपात कम होता है, वहां राष्ट्रीय पहचान और भारत से जुड़ाव को लेकर अलग तरह की परिस्थितियां बन सकती हैं।
उन्होंने बेंगलुरु के शिवाजीनगर और चामराजपेट का उदाहरण देते हुए राजनीतिक प्रतिनिधित्व की स्थिति का जिक्र किया। संतोष ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान के संदर्भ में हिंदू समाज की बहुसंख्यक स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।
अखंड भारत को लेकर क्या बोले संतोष?
अखंड भारत के विचार पर बीएल संतोष ने कहा कि इसे केवल भौगोलिक या प्रशासनिक सीमा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह एक सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी विचार है।
उन्होंने लोगों से अखंड भारत के लक्ष्य के लिए संकल्प लेने की अपील की। अपने तर्क के समर्थन में उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण तथा वियतनाम के एकीकरण का उदाहरण भी दिया।
प्रियांक खरगे ने बीएल संतोष के दावे को नकारा
हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के दौरान आरएसएस की भूमिका को लेकर बीएल संतोष द्वारा किए गए दावों पर प्रियांक खरगे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरएसएस की भूमिका के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनके परिवार और उस समय के लोगों की सुरक्षा भारतीय नेतृत्व और सेना के प्रयासों से हुई थी।
खरगे ने इस संदर्भ में जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और भारतीय सेना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हैदराबाद के भारत में विलय का इतिहास तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
ऑपरेशन पोलो पर भी राजनीतिक घमासान
हैदराबाद के भारत में विलय को लेकर दोनों नेताओं के बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। प्रियांक खरगे ने कहा कि सितंबर 1948 में हैदराबाद रियासत को भारतीय संघ में शामिल करने के लिए ऑपरेशन पोलो चलाया गया था, जिसमें भारतीय सेना की प्रमुख भूमिका रही।
दूसरी ओर, बीएल संतोष ने उस दौर में आरएसएस कार्यकर्ताओं की भूमिका का दावा किया है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
सरकारी संपत्ति विधेयक पर भी खरगे का भाजपा को जवाब
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सरकारी संपत्ति से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर भाजपा के विरोध पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विधेयक में किसी खास राजनीतिक दल या संगठन को निशाना बनाने का प्रावधान नहीं है।
खरगे के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को नियमों के दायरे में रखना और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था लागू करना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर निजी कार्यक्रमों के लिए निर्धारित अनुमति प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने भाजपा के विरोध को राजनीतिक प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल को व्यवस्थित और नियंत्रित करना है।
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