PM Modi: ‘दुनिया के साथ और दुनिया के लिए आगे बढ़ता है भारत’, ब्लूमबर्ग फोरम में बताया सशक्तिकरण का मंत्र

PM Modi: प्रधानमंत्री ने तकनीक, डेटा और ज्ञान को आम लोगों के अवसर बढ़ाने का माध्यम बताया, नियंत्रण की जगह सहयोग पर दिया जोर

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए भारत की विकास सोच और वैश्विक भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी प्रगति को दुनिया से अलग करके नहीं देखता, बल्कि वैश्विक सहयोग के जरिए आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘पावर टू एम्पावर’ यानी दूसरों को सशक्त बनाने की शक्ति का विचार सामने रखा।

पीएम मोदी के मुताबिक, आज के दौर में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ताकत के प्रमुख स्रोत बन चुके हैं। महत्वपूर्ण यह है कि इनका इस्तेमाल केवल कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए न हो, बल्कि इनके जरिए करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर तैयार किए जाएं।

भारत में फोरम के आयोजन को बताया अहम

प्रधानमंत्री ने भारत में पहली बार ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम आयोजित किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने फोरम के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में इस आयोजन का फैसला सही समय पर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के वैश्विक मंचों पर अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा होती है। भारत में फोरम का आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब देश अपनी आर्थिक क्षमताओं को मजबूत करने के साथ वैश्विक विकास में भी भागीदारी बढ़ा रहा है।

तकनीक और ज्ञान का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आधुनिक दुनिया में शक्ति का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि संसाधन किसके पास हैं। असली सवाल यह है कि उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि तकनीक और ज्ञान का लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहने के बजाय समाज के व्यापक हिस्से तक पहुंचना चाहिए। इससे अधिक लोगों को आगे बढ़ने और अपनी क्षमता का इस्तेमाल करने का अवसर मिल सकता है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल तकनीक और नवाचार को ऐसी व्यवस्था बनाने में मदद करनी चाहिए, जिसमें विकास के अवसर ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध हों।

‘भारत दुनिया के साथ मिलकर आगे बढ़ता है’

पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया को सहयोग और समर्थन की जरूरत होती है, तब भारत अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा दूसरों को नुकसान पहुंचाकर आगे बढ़ने की सोच पर आधारित नहीं है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत दुनिया के साथ मिलकर और दुनिया के हित में आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि भारत अपने कामों का श्रेय लेने के बजाय ऐसी पहल करने पर ध्यान देता है, जिनका लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच सके।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसी पहलों का किया उल्लेख

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की ओर से शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कुछ उदाहरण भी दिए। इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) शामिल हैं।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस का उद्देश्य सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में देशों के बीच सहयोग मजबूत करना है। वहीं, CDRI का फोकस ऐसी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर है, जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को बेहतर ढंग से झेल सकें।

पीएम मोदी ने इन पहलों को ऐसी वैश्विक कोशिशों के उदाहरण के रूप में पेश किया, जिनका उद्देश्य किसी एक देश तक सीमित रहने के बजाय कई देशों और समुदायों को लाभ पहुंचाना है।

प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सहयोग की जरूरत

प्रधानमंत्री ने विकास के तरीके में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसी सोच की जरूरत है, जिसमें नियंत्रण के बजाय लोगों को सक्षम बनाने, प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और केवल अपनी सफलता के बजाय दूसरों की प्रगति में योगदान देने को महत्व मिले।

उन्होंने कहा कि ज्ञान, धन और शक्ति का महत्व इस बात से तय होता है कि उनका इस्तेमाल किस मकसद के लिए किया जा रहा है। भारत की परंपराओं में भी इन संसाधनों के जिम्मेदारी से उपयोग पर जोर दिया गया है।

‘शक्ति का वास्तविक मूल्य उसके उद्देश्य में’

पीएम मोदी ने कहा कि किसी व्यक्ति, संस्था या देश के पास मौजूद ताकत अपने आप में अंतिम लक्ष्य नहीं होनी चाहिए। उसका वास्तविक मूल्य इस बात में है कि उससे समाज और लोगों को कितना फायदा मिलता है।

उन्होंने भारत की प्राचीन परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान, धन और शक्ति का इस्तेमाल व्यापक उद्देश्य के लिए करने की सोच देश के लिए नई नहीं है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत ने अपनी शासन व्यवस्था और विभिन्न पहलों में इस दृष्टिकोण को लागू करने का प्रयास किया है।

500 से ज्यादा वैश्विक प्रतिनिधियों की भागीदारी

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के आठवें संस्करण में दुनिया भर से सरकारी और निजी क्षेत्र के 500 से अधिक प्रभावशाली प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। इस बार फोरम की थीम ‘A World in Play: Defining the New Levers of Power’ रखी गई।

इस मंच पर भू-राजनीतिक बदलावों, वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूद जोखिमों और अवसरों तथा भविष्य की समृद्धि से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाना है।

प्रधानमंत्री ने भारत को केवल निवेश के केंद्र के रूप में देखने के बजाय वैश्विक भविष्य को आकार देने वाले भागीदार के तौर पर प्रस्तुत किया। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश वैश्विक विकास में योगदान देने और संतुलित आर्थिक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में प्रयास कर रहा है।

वैश्विक विकास में भारत की भूमिका पर जोर

ब्लूमबर्ग फोरम में पीएम मोदी का संबोधन तकनीक, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच संबंध पर केंद्रित रहा। उन्होंने इस बात को प्रमुखता दी कि आधुनिक संसाधनों और शक्ति का उपयोग अधिक लोगों को अवसर देने के लिए होना चाहिए।

प्रधानमंत्री के ‘पावर टू एम्पावर’ विजन का केंद्रीय विचार यही है कि विकास का लाभ व्यापक समाज तक पहुंचे। उनके संबोधन में भारत की वैश्विक साझेदारियों, स्वच्छ ऊर्जा और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे से जुड़ी पहलों को इसी दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में रखा गया।

written by Siddhi Srivastava

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