
महाराष्ट्र के परभणी जिले में शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया। मानवत तालुका स्थित यशवाड़ी मारुति मंदिर परिसर में निर्माणाधीन सभामंडप का पत्थर का खंभा अचानक गिर जाने से छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य लोग घायल हो गए। हादसे के समय मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, निर्माणाधीन सभामंडप का एक विशाल पत्थर का खंभा अचानक ढह गया, जिसके बाद आसपास मौजूद श्रद्धालु मलबे में दब गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। बाद में जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत दल भी मौके पर पहुंच गए।
कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच बचाव अभियान पूरा हुआ। घायलों को परभणी, नांदेड़ और आरपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। प्रशासन ने घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
हादसे में मृतकों की पहचान संतोष सर्जेराव गडदे (गडदे पांगरा), आकाश सुरदुसे (परभणी), मुनेश रामबिलास अग्रवाल (जिंतूर, परभणी) और सुरज बाबासाहेब पोपटकर (इटोली, परभणी) के रूप में हुई है। एक मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है, जिसकी उम्र लगभग 45 वर्ष बताई जा रही है। छठे मृतक की विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
घायलों में दादाराव रानोजी भांगे, रामकृष्ण नागोराव बादाडे, परमेश्वर पुंडलिक राऊत, सौरभ गजानन कोथाळकर, केशव गिरी, प्रवीण रघुनाथ हलगे, गणेश ईकर, ओमकार मारुती कोपरकर, रामेश्वर रामकिशन गोंडे, रामा वेंकटराव होगे, अनिकेत संतोष गडदे, हनुमंत लिपणे, प्रवीण प्रकाश राजबिंडे, नारायण दौलत खरात, ऋषिकेश कोपरटकर, श्रीकृष्ण रुस्तुम भोसले, अभिषेक कृष्णा वाघमारे और भरत रामचंद्र कळसाईतकर शामिल हैं।
हादसे के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि निर्माणाधीन संरचना के गिरने के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी हादसे पर शोक जताते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं।
यह हादसा पूरे महाराष्ट्र के लिए एक बड़ी त्रासदी बनकर सामने आया है। घटना ने निर्माणाधीन धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा होने की उम्मीद है।


