स्नान के बाद धारण करेंगे ‘सादा बेश
धार्मिक आस्था का अनूठा पर्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के पावन अवसर पर मनाया जाने वाला देव स्नान पूर्णिमा (स्नान यात्रा) श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम है। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र का विधि-विधान से भव्य महाअभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान के दिव्य स्नान के दर्शन करने मात्र से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। कीडगंज जगन्नाथ मंदिर के महामंत्री डॉ. महेंद्र तिवारी के अनुसार, देव स्नान पूर्णिमा के दिन मंदिर परिसर स्थित कुंए के पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र का 108 कलशों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक किया जाता है। यह अनुष्ठान अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का माना जाता है।
अभिषेक के उपरांत होता है श्रृंगार
महाअभिषेक के उपरांत भगवान को विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें ‘सादा बेश’ नामक पोशाक धारण कराया जाता है। इसके बाद शाम को भगवान गणेश के रूप में सजाया जाता है, उनके इस स्वरूप को ‘गजानन बेश’ और इसके उपरांत भगवान का दर्शन के लिए पट खोल दिया जाता है, भगवान के इस स्वरूप को ‘सहना मेला’ कहा जाता है इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान का स्नान और विशेष वेशभूषा भक्तों के लिए मंगलकारी एवं कल्याणकारी होती है। इसी के साथ उन्होंने बताया कि देव स्नान पूर्णिमा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का जीवंत प्रतीक भी है। इस पर्व के माध्यम से भगवान और भक्त के बीच प्रेम, समर्पण और विश्वास का संबंध और अधिक प्रगाढ़ होता है। देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन तथा धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जबकि श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। पंडित दीपू तिवारी के अनुसार, देव स्नान पूर्णिमा के साथ ही भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारियों का भी शुभारंभ माना जाता है। ऐसे में यह पर्व सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बनता है।

16 जुलाई को निकलेगी भव्य शोभा यात्रा
शहर में भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की भव्य रथ यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक यह उत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। आयोजन की शुरुआत 29 जून 2026 को स्नान पूर्णिमा उत्सव से होगी, जबकि 16 जुलाई 2026 को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। उत्सव का समापन 19 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले महाप्रसाद उत्सव के साथ होगा। रथ यात्रा का शुभारंभ प्रयागराज के कीडगंज स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर से होगा। विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान के विग्रहों को सुसज्जित रथ पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में रथ यात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों और स्थानीय स्थलों से होकर निकलेगी। पूरे मार्ग में श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर पुष्प वर्षा करेंगे तथा भजन-कीर्तन और जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहेगा।
रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी



