
अमेरिका और इजरायल के साथ हालिया सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को लेकर बड़ा दावा किया है। ईरानी सेना का कहना है कि संघर्ष के दौरान उसने नई पीढ़ी के ड्रोन और अपग्रेडेड मिसाइल सिस्टम विकसित किए, जिन्हें युद्ध के अंतिम चरण में इस्तेमाल भी किया गया। ईरान के अनुसार, यह उसकी सैन्य तकनीक और अनुसंधान क्षमता में हुई प्रगति का परिणाम है।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरामिनिया ने बताया कि युद्ध के दौरान भी अनुसंधान और विकास (R&D) का काम लगातार जारी रखा गया। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों पर पहले से काम चल रहा था, लेकिन संघर्ष के दौरान उन्हें अंतिम रूप देकर सेना में शामिल किया गया। उनका दावा है कि नए ड्रोन पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और प्रभावी हैं।
अकरामिनिया ने यह भी कहा कि ईरान ने अपने पुराने मिसाइल सिस्टम में भी व्यापक सुधार किए हैं। तकनीकी अपग्रेड के जरिए मिसाइलों की सटीकता, क्षमता और प्रभावशीलता बढ़ाई गई है। उनके मुताबिक, घरेलू रक्षा उत्पादन को मजबूत करने के साथ-साथ मित्र देशों से आधुनिक सैन्य उपकरण हासिल करने की दिशा में भी काम किया गया।
ईरान का कहना है कि हालिया संघर्ष ने उसकी सैन्य तैयारियों की परीक्षा ली, लेकिन इसी दौरान नई रक्षा तकनीकों को विकसित करने का अवसर भी मिला। सेना के अनुसार, युद्ध के दौरान पुराने हथियारों के साथ-साथ नए सिस्टम को भी धीरे-धीरे ऑपरेशनल बनाया गया।
गौरतलब है कि हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया था। इसके बाद ईरान ने कई चरणों में जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों तथा इजरायल को निशाना बनाने की बात कही। इन घटनाओं के बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया था।
हालांकि बाद में क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास भी शुरू हुए। विभिन्न देशों की मध्यस्थता के बाद संघर्ष को सीमित करने और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने को लेकर बातचीत आगे बढ़ी। इन प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना और आगे किसी बड़े सैन्य टकराव की संभावना को कम करना था।
ईरान का यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में सैन्य संतुलन और सुरक्षा को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। हालांकि, ईरान द्वारा किए गए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन दावों की वास्तविक क्षमता और प्रभाव का आकलन विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और सुरक्षा विश्लेषकों की रिपोर्टों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।



