New Delhi News-ब्रिक्स सम्मेलनः वैश्विक गुटबाजी के बीच चमकी भारतीय कूटनीति

New Delhi News – BRICS Summit: Indian diplomacy shines amidst global factionalism.

New Delhi News:हाल ही में संपन्न हुआ 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के इतिहास में भारत के बढ़ते रसूख और भारतीय विदेश मंत्रालय की बेजोड़ रणनीतिक सूझबूझ की एक कालजयी कहानी बन गया है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक गुटबाजी के इस दौर में, दुनिया भर की निगाहें नई दिल्ली पर टिकी थीं। लेकिन भारतीय राजनयिकों ने अपनी दूरदर्शी कूटनीति से न केवल मतभेदों को पाटा, बल्कि सम्मेलन के पहले ही दिन ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ पर सभी सदस्य देशों की आम सहमति बनाकर दुनिया को चौंका दिया। 140 पैराग्राफ वाले इस जटिल घोषणापत्र को बिना किसी गतिरोध के पारित कराना विदेश मंत्रालय की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है।
भारतीय विदेश मंत्रालय की सबसे बड़ी सफलता वैश्विक मंच पर ‘ब्रिज बिल्डर’ यानी संकटमोचक के रूप में उभरना रही। तनावपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच, भारत ने पश्चिम एशिया के दो धुर विरोधी देशों, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद को एक मंच पर ही नहीं लाया, बल्कि सम्मेलन के इतर उनके बीच एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक का रास्ता भी साफ किया। इसके अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की 7 वर्षों बाद हुई भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी के साथ सीमा शांति और व्यापार असंतुलन पर सार्थक संवाद स्थापित कराना विदेश मंत्रालय की रणनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।
इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के सफल आयोजन पर खुशी जाहिर करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने विदेश मंत्रालय की ब्रिक्स टीम को बधाई दी है। डॉ. जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा विदेश मंत्रालय की ब्रिक्स टीम को बधाई। आपकी अटूट प्रतिबद्धता और प्रोफेशनलिज्म ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की सफलता में योगदान दिया। इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा यह एक जटिल कार्य था, जिसके लिए सचमुच ‘पूरी सरकार’ और यहां तक कि ‘पूरे देश’ के सम्मिलित प्रयासों की आवश्यकता थी। उन्होंने विदेश मंत्रालय की ओर से सम्मेलन के आयोजन में सहयोग करने वाले विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
भारत ने इस मंच से अपने सुरक्षा एजेंडे को भी बेहद मजबूती से आगे बढ़ाया। डिक्लेरेशन में पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा को शामिल कराना भारत की आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को वैश्विक मान्यता दिलाता है। इसके साथ ही, भारत ने क्रिटिकल मिनरल्स और आधुनिक तकनीक के ‘वेपनाइजेशन’ (हथियारीकरण) पर प्रहार करते हुए ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आवाज को बुलंद किया। वित्तीय सुधारों के मामले में, किसी नई ब्रिक्स मुद्रा के बजाय स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम पर सहमति बनाना भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की एक बड़ी कामयाबी है।
इस गंभीर कूटनीति को जन-केंद्रित बनाने के लिए विदेश मंत्रालय ने ‘क्राफ्ट डिप्लोमेसी’ (शिल्प कूटनीति) का सहारा लिया। नई दिल्ली में आयोजित 6 दिवसीय ‘ब्रिक्स बाजार’ में रूस के पारंपरिक लैकर मिनिएचर और दक्षिण अफ्रीका के बीडवर्क जैसे शिल्पों का सजीव प्रदर्शन कर भारत ने अपनी सॉफ्ट पावर का लोहा मनवाया। देश के 30 अलग-अलग शहरों में युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित 400 से अधिक कार्यक्रमों का सफल संचालन कर विदेश मंत्रालय ने साबित कर दिया कि भारत की ‘ग्लोबल साउथ’ को एकजुट करने और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (विश्व एक परिवार है) की नीति केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर भी पूरी दुनिया को एक नई दिशा दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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रिपोर्ट-शाश्वत तिवारी

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