Nepal Floods: नेपाल में बाढ़ का कहर, शिक्षक ने 1600 से ज्यादा छात्रों की बचाई जान

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नेपाल में भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने घरों, सड़कों और इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। त्रिशूली में हालात बेहद भयावह रहे। यहां बाढ़ की चपेट में एक स्कूल भी आ गया। हालांकि, एक शिक्षक की सूझबूझ और साहस से स्कूल में मौजूद 1600 से ज्यादा छात्रों की जान बच गई।

बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था। ऐसे में शिक्षक ने खतरे को भांपते हुए छात्रों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कोशिश शुरू की। समय रहते सभी छात्रों को स्कूल से बाहर निकाल लिया गया। इसके कुछ ही देर बाद बाढ़ का पानी स्कूल की इमारत तक पहुंच गया।

बाढ़ में बह गया तीन मंजिला स्कूल

स्थानीय निवासी सुरेंद्र कुमार ने तबाही का दर्दनाक मंजर बताया। उनके मुताबिक, जिस जगह कभी स्कूल की इमारत खड़ी थी, वहां अब मलबा और कीचड़ नजर आ रहा है।

बाढ़ इतनी तेज थी कि तीन मंजिला स्कूल और पास स्थित राम मंदिर भी पूरी तरह बह गए। इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। हालांकि, कई प्रभावित इलाकों में पहुंचना मुश्किल होने के कारण नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो पाया है।

भारत और नेपाल की टीमें जुटीं

आपदा के बाद भारत और नेपाल की टीमें संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। भारत की विशेष टनल सर्च एंड रेस्क्यू टीम भी नेपाल पहुंची है। यह टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के प्रभावित हाइड्रोपावर टनल क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान चला रही है।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भी बचाव अभियान को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय और नेपाली एजेंसियां मिलकर राहत और बचाव कार्य जारी रखे हुए हैं।

794 शव बरामद, हजारों लोग लापता

ताजा आंकड़ों के अनुसार, आपदा में अब तक 794 शव बरामद किए जा चुके हैं। चितवन सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है, जहां 264 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व और पश्चिम, गोरखा, नुवाकोट, धादिंग, तनहूं और रसुवा में भी भारी नुकसान हुआ है।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 2502 लोग अब भी लापता हैं। इनमें हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले 933 कर्मचारी और 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

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हजारों लोगों का रेस्क्यू

बचाव अभियान में करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। जमीनी टीमों ने अब तक 8730 लोगों को सुरक्षित निकाला है। वहीं हेलीकॉप्टरों की 363 उड़ानों के जरिए 3081 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर टनल से भी 279 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। राहत और बचाव अभियान के साथ ही प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी जारी है।

घायलों के इलाज के लिए मेडिकल टीमें तैनात

आपदा में 239 लोगों के घायल होने की जानकारी है। कई घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि कुछ उपचार के बाद घर लौट चुके हैं। प्रभावित इलाकों में छह सर्जिकल मेडिकल टीमों को भी तैनात किया गया है।

इसके साथ ही बाढ़ और भूस्खलन के कारण बंद हुई सड़कों को खोलने का काम भी चल रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि राहत सामग्री और बचाव दल जल्द से जल्द प्रभावित इलाकों तक पहुंच सकें।

शिक्षक का साहस बना मिसाल

नेपाल की इस त्रासदी के बीच 1600 से ज्यादा छात्रों को बचाने वाले शिक्षक की बहादुरी चर्चा में है। जब स्कूल के आसपास पानी तेजी से बढ़ रहा था, तब उन्होंने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना बच्चों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई।

एक तरफ जहां बाढ़ ने स्कूल और आसपास की इमारतों को तबाह कर दिया, वहीं दूसरी तरफ इस शिक्षक की तत्परता ने सैकड़ों परिवारों को अपनों को खोने से बचा लिया। उनका साहस आपदा के बीच इंसानियत और जिम्मेदारी की एक मिसाल बनकर सामने आया है।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। लापता लोगों की तलाश के साथ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में नुकसान और हताहतों की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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