Nepal Flood 2026: नेपाल में भोटेकोशी नदी का कहर, 16 की मौत और कई लापता; चीन सीमा के पास तबाही, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, जबकि सेना और सुरक्षा बलों ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया है।

Nepal Flood 2026: नेपाल में चीन सीमा के पास बुधवार तड़के अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी के आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है। बाढ़ के बाद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

अचानक आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर चीन सीमा से लगे इलाकों में दिखाई दिया है। नदी के तेज बहाव की चपेट में आने से बाजार, सुरक्षा चौकियों और नदी किनारे बने दूसरे बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की ओर से नदी के बहाव की दिशा में आने वाले कई इलाकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

नेपाली सेना के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान में 14 हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं। सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवान प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। बुधवार दोपहर तक कम से कम 25 लोगों को बचाए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, नदी का तेज बहाव और पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां राहत कार्य में चुनौती बनी हुई हैं।

नेपाल-चीन सीमा के पास तिमुरे इलाके में तैनात सशस्त्र पुलिस बल के नौ जवानों के भी लापता होने की सूचना है। अधिकारियों की ओर से प्रभावित इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी जारी है।

नेपाल सरकार ने इस आपदा के बाद भारत और चीन से भी मदद मांगी है। सरकार की ओर से बताया गया है कि विदेश मंत्रालय दोनों पड़ोसी देशों के साथ समन्वय कर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सहायता हासिल करने की कोशिश कर रहा है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और बचाव दल पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि भोटेकोशी नदी में अचानक इतनी भीषण बाढ़ आई कैसे। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग से जुड़े अधिकारियों को कथित तौर पर ऐसी जानकारी मिली थी कि तिब्बत क्षेत्र में भूस्खलन के कारण नदी के बहाव में किसी तरह की रुकावट पैदा हुई थी।

संभावना जताई जा रही है कि नदी के रास्ते में अचानक अवरोध बनने से पानी जमा हुआ और उसके बाद यह अवरोध टूटने पर बड़ी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर आया। इससे भोटेकोशी नदी का बहाव अचानक बेहद तेज हो गया और नदी के आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी बाढ़ के अंतिम और आधिकारिक कारण की पुष्टि नहीं की गई है।

पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की अचानक आने वाली बाढ़ बेहद खतरनाक मानी जाती है। नदी के ऊपरी हिस्से में भूस्खलन या किसी प्राकृतिक अवरोध के कारण पानी का रास्ता रुक जाने पर कुछ समय के लिए जलस्तर बढ़ सकता है। अगर अचानक यह अवरोध टूट जाए तो नीचे के इलाकों में बहुत कम समय में भारी मात्रा में पानी पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में लोगों को संभलने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।

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भोटेकोशी नदी के किनारे मौजूद कई इलाकों में बाढ़ के कारण संपर्क व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। स्थानीय स्तर पर सड़कों और दूसरे बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचने की खबर है। ऐसे में हेलिकॉप्टरों के जरिए राहत और बचाव अभियान चलाना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

नेपाल में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं, लेकिन इस बार भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि संभावित खतरे वाले इलाकों से लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।

फिलहाल राहत और बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और नदी के जलस्तर तथा संभावित भूस्खलन को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है।

भोटेकोशी बाढ़ ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को सामने ला दिया है। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों को खोजने, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और संवेदनशील इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है। बाढ़ के पीछे वास्तव में कौन-सा प्राकृतिक घटनाक्रम जिम्मेदार था, इसकी तस्वीर विस्तृत जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगी।

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