
CJP Protest News : टीवी के लोकप्रिय किरदार ‘शक्तिमान’ और ‘भीष्म पितामह’ के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना ने हालिया स्टूडेंट प्रोटेस्ट को लेकर बड़ा दावा किया है। एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर सवाल उठाए। मुकेश खन्ना ने आरोप लगाया कि आंदोलन में बाहरी लोगों और विदेशी ताकतों ने दखल दिया और प्रदर्शन को हिंसक बनाने के लिए कथित तौर पर फंडिंग की गई।
पेपर लीक पर क्या बोले मुकेश खन्ना?
मुकेश खन्ना ने कहा कि आज की जेन-जी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रही है, लेकिन प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा शिक्षा के कंटेंट या पढ़ाई के तरीके के बजाय पेपर लीक बन गया है। उनके मुताबिक पेपर लीक एक गंभीर समस्या है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अभिनेता ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं नई नहीं हैं। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए दावा किया कि करीब 40 साल पहले भी उन्होंने पेपर लीक की घटनाएं देखी थीं। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में दोषियों को पकड़ना चाहिए।
‘आंदोलन में बाहर के लोग घुसे’
मुकेश खन्ना ने दावा किया कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट में कुछ बाहरी लोगों ने प्रवेश किया और विदेशी ताकतों की ओर से भी कथित तौर पर समर्थन या फंडिंग की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य आंदोलन को हिंसक बनाना और दंगा कराने की कोशिश करना था।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने बातचीत के दौरान कोई सार्वजनिक सबूत या दस्तावेज पेश नहीं किया। इसलिए विदेशी फंडिंग और बाहरी हस्तक्षेप से जुड़े उनके दावों को आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस पर हमले को लेकर भी जताई नाराजगी
मुकेश खन्ना ने प्रदर्शन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा हुई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई आंदोलन छात्रों के अधिकारों और भविष्य से जुड़ा है तो उसे शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक, पुलिस पर हमला करने वाली घटनाओं को केवल छात्रों के आंदोलन के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
‘मानवीय मुद्दे को राजनीतिक बना दिया गया’
मुकेश खन्ना ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा मूल रूप से छात्रों के भविष्य से जुड़ा मानवीय मुद्दा था। उनका कहना है कि पेपर लीक होने से छात्रों के भविष्य और मेहनत पर असर पड़ता है, इसलिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग जायज है।
हालांकि, उनके मुताबिक बाद में इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के सामने दिखाई देने वाले लोग अलग थे, जबकि इसका राजनीतिक फायदा किसी और पक्ष को मिल रहा था।
‘आंदोलन के पीछे कौन था, यह देखना जरूरी’
मुकेश खन्ना ने कहा कि उन्हें बाद में लगा कि आंदोलन में हुई कुछ घटनाएं स्वतः नहीं हुईं, बल्कि इसके पीछे किसी तरह की फंडिंग या बाहरी भूमिका हो सकती है। उन्होंने अपने दावे को लेकर लद्दाख और नेपाल में हुए आंदोलनों का भी जिक्र किया।
मुकेश खन्ना के बयान के बाद स्टूडेंट प्रोटेस्ट, पेपर लीक और आंदोलनों में बाहरी फंडिंग के आरोपों को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, विदेशी फंडिंग या किसी संगठित साजिश के दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच या ठोस सबूत जरूरी होंगे।



