
Mayawati BSP Action: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए दो वरिष्ठ नेताओं पर कड़ी कार्रवाई की है। मायावती ने पूर्व सांसद और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक अशोक सिद्धार्थ तथा वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस फैसले को आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने और अनुशासन कायम रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अशोक सिद्धार्थ का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह मायावती के भतीजे और बसपा नेता आकाश आनंद के ससुर हैं। इससे पहले भी वर्ष 2025 में उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाला गया था। हालांकि लगभग छह महीने बाद मायावती ने उन्हें एक और मौका देते हुए पार्टी में वापस शामिल कर लिया था। लेकिन अब दूसरी बार कार्रवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया गया है कि भविष्य में उन्हें पार्टी में दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा।
मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण में पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन नहीं किया गया और प्रदेश नेतृत्व के साथ समन्वय की कमी रही। इसके बाद भी उन्हें सुधार का अवसर दिया गया, लेकिन उन्होंने कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के प्रभारी रहते हुए भी पार्टी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन जारी रखा। मायावती ने आरोप लगाया कि उनकी गतिविधियां उत्तर प्रदेश में पार्टी के चुनाव अभियान को प्रभावित करने वाली थीं, इसलिए उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर पार्टी से स्थायी रूप से निष्कासित किया गया है।
इसी के साथ बसपा को-ऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी अनुशासनहीनता और पार्टी निर्देशों की अनदेखी के आरोप लगे। वह पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी थे। मायावती ने कहा कि लगातार शिकायतें मिलने और चेतावनी के बावजूद उनके व्यवहार में सुधार नहीं आया। इसके चलते उन्हें भी तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर कर दिया गया।
बसपा प्रमुख ने संगठनात्मक बदलाव के तहत राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को अन्य राज्यों के साथ पंजाब का प्रभार भी सौंप दिया है। अब वे पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मायावती संगठन में अनुशासन और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही हैं। हाल के दिनों में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि बसपा आगामी विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी और किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं पर की गई यह कार्रवाई पार्टी के भीतर स्पष्ट संदेश के रूप में देखी जा रही है।



