KPSC Recruitment Scam: परीक्षा से पहले रिसॉर्ट में दी गई आंसर की! 50 लाख रुपये तक वसूली का आरोप

KPSC Recruitment Scam: कर्नाटक में पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक का मामला, ED की जांच में 10 चयनित उम्मीदवारों के नाम सामने आए; पूर्व परीक्षा नियंत्रक समेत कई गिरफ्तार

KPSC Recruitment Scam:  कर्नाटक में सरकारी नौकरी की भर्ती से जुड़ा कथित घोटाला सामने आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से एक दिन पहले ही सवालों के जवाब उपलब्ध करा दिए गए थे। आरोप है कि इसके बदले उनसे लाखों रुपये लिए गए।

जांच एजेंसी के मुताबिक, उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाया गया था। वहां उन्हें कथित तौर पर प्रश्नपत्र और सही विकल्प उपलब्ध कराए गए, ताकि वे परीक्षा से पहले उत्तर याद कर सकें।

यह परीक्षा 8 और 9 जनवरी को पशु चिकित्सा अधिकारियों के 400 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। ED ने अपनी जांच में अब तक ऐसे 10 उम्मीदवारों की पहचान किए जाने की बात कही है, जिनके चयन को कथित तौर पर लीक हुई परीक्षा सामग्री से जोड़ा गया है।

चयन के नाम पर 40 से 50 लाख रुपये लेने का आरोप

ED का आरोप है कि भर्ती में चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर प्रत्येक उम्मीदवार से 40 से 50 लाख रुपये तक की रकम वसूली गई। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि छह उम्मीदवारों को उनके लिए अलग से तैयार की गई आंसर की उपलब्ध कराई गई थी।

एजेंसी के मुताबिक, इन उम्मीदवारों से कथित तौर पर 20 से 40 लाख रुपये तक लिए गए। जांचकर्ताओं को संदेह है कि परीक्षा से पहले उत्तर उपलब्ध कराने और भर्ती में चयन का भरोसा देने के लिए अलग-अलग स्तर पर रकम का लेनदेन हुआ।

हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी की ओर से सामने रखे गए हैं। मामले में संबंधित आरोपियों की कानूनी स्थिति और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक पर भी जांच एजेंसी के आरोप

इस मामले में तत्कालीन KPSC परीक्षा नियंत्रक और IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार का नाम भी सामने आया है। ED के अनुसार, परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री तक उनकी पहुंच थी और कथित तौर पर उनके सहयोगी बसवराज कन्नाले के माध्यम से प्रश्नपत्र या उत्तर उम्मीदवारों तक पहुंचाए गए।

जांच एजेंसी का दावा है कि कन्नाले उम्मीदवारों से संपर्क करने और उनसे रकम लेने की व्यवस्था में शामिल था। आरोप है कि उसने भर्ती में चयन कराने के नाम पर उम्मीदवारों से 40 से 50 लाख रुपये तक वसूले।

ED ने इस मामले में गंगवार और कन्नाले को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, कन्नाले को 17 सितंबर और गंगवार को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

पूर्व KPSC अध्यक्ष और आयोग की सदस्य भी गिरफ्तार

जांच का दायरा आयोग के अन्य पदाधिकारियों तक भी पहुंचा है। ED ने निलंबित KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा सहुकार और आयोग की सदस्य बीवी गीता को भी गिरफ्तार किया है।

एजेंसी का आरोप है कि बीवी गीता ने गंगवार से कथित तौर पर लीक हुई आंसर की प्राप्त की थी। जांच के मुताबिक, उन्होंने एक उम्मीदवार से 40 लाख रुपये की कथित रिश्वत में से 20 लाख रुपये अग्रिम के तौर पर लिए थे।

इसी तरह, सहुकार पर एक उम्मीदवार से 20 लाख रुपये की कथित रिश्वत में से 10 लाख रुपये एडवांस लेने का आरोप लगाया गया है। ED ने 6 अक्टूबर को दोनों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसके बाद दोनों की गिरफ्तारी की गई।

उम्मीदवार के पास से मिले हस्ताक्षर किए हुए चेक

जांच के दौरान ED ने एक सफल उम्मीदवार के पास से 80 लाख रुपये के खाली हस्ताक्षर किए हुए चेक और हस्ताक्षर किए हुए खाली प्रॉमिसरी नोट बरामद करने का दावा किया है।

जांच एजेंसी इन दस्तावेजों को कथित रिश्वत लेनदेन से जोड़कर देख रही है। इनकी बरामदगी से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भर्ती प्रक्रिया में रकम का लेनदेन किस तरह हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

ED के अनुसार, इस मामले की जांच कर्नाटक में पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से संबंधित पुलिस की ओर से दर्ज FIR के आधार पर की जा रही है।

400 पदों की भर्ती पर उठे सवाल

पशु चिकित्सा अधिकारी के 400 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र या उत्तर पहले से उपलब्ध कराने के आरोप उन अभ्यर्थियों के लिए भी चिंता का विषय हैं, जो लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं।

फिलहाल ED कथित पेपर लीक, धन के लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से यह स्पष्ट होगा कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी किस स्तर तक फैली थी।

written by Siddhi Srivastava

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