
Iran-US Conflict: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। तीन दिनों की अपेक्षाकृत शांति के बाद बुधवार सुबह ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसने इन सभी मिसाइलों को अपने हवाई क्षेत्र में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, जिससे बड़े नुकसान को टाल दिया गया।
ईरान के इस हमले ने क्षेत्र में संघर्ष विराम की संभावनाओं को बड़ा झटका दिया है। हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तनाव कम करने के संकेत दिए जा रहे थे, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने स्थिति को फिर से विस्फोटक बना दिया है।
अमेरिकी ठिकानों को बनाया गया निशाना
जॉर्डन की सेना के मुताबिक, मिसाइलों का लक्ष्य जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक अल-सालती एयर बेस और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) से जुड़े सैन्य ठिकाने थे। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है।
इससे कुछ घंटे पहले अमेरिका ने भी अपने सैनिकों को निशाना बनाकर दागी गई ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया था।
अमेरिका ने भी किया जवाबी हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसने सऊदी अरब के सहयोग से इराक के पूर्वी हिस्से में ईरान समर्थित मिलिशिया के कई ठिकानों पर कार्रवाई की। अमेरिका का आरोप है कि इन समूहों ने पिछले 72 घंटों में 30 से अधिक ड्रोन हमले किए थे।
सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वह अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा, हालांकि उसका उद्देश्य संघर्ष को और अधिक बढ़ाना नहीं है।
इराक में बढ़ी हलचल
इराक की पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई में उसके कम से कम 20 लड़ाके मारे गए जबकि 32 अन्य घायल हुए। हालात की गंभीरता को देखते हुए इराकी प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव की बड़ी वजह
क्षेत्रीय तनाव का एक प्रमुख कारण होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है।
ओमान ने इस समुद्री मार्ग के संचालन को लेकर एक प्रस्ताव दिया था, लेकिन ईरान ने उसे खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध से पहले जैसी समुद्री व्यवस्था अब स्वीकार्य नहीं होगी और तेहरान अपना अलग प्रस्ताव लागू करना चाहता है।
तेल बाजार पर भी दिखा असर
संघर्ष बढ़ने की आशंका के बीच वैश्विक तेल बाजार में भी हलचल देखी गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 3.1 प्रतिशत बढ़कर 84.58 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
आगे क्या?
ईरान, अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया को फिर से अस्थिर कर दिया है। मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास तनाव कम कर पाएंगे या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।



