Business News: मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत ने फिर बढ़ाई Oil-Gas Exploration की डेडलाइन, जानिए सरकार का बड़ा संकेत

तेल-गैस ब्लॉकों की बोली जमा करने की अंतिम तारीख अब 19 जून, विदेशी निवेश और ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस

Business News: भारत सरकार ने तेल और गैस खोज लाइसेंसिंग के दसवें दौर के तहत बोली जमा करने की समयसीमा एक बार फिर बढ़ा दी है। अब कंपनियां 19 जून 2026 तक अपनी बोलियां जमा कर सकेंगी। फरवरी 2025 में शुरू हुए इस दौर में यह पांचवीं बार है जब डेडलाइन बढ़ाई गई है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां नए निवेश को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं।

ऐसे माहौल में सरकार द्वारा तेल-गैस ब्लॉकों की बोली की समयसीमा बढ़ाना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इससे वैश्विक कंपनियों को तकनीकी और आर्थिक मूल्यांकन के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा और भारत में निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।

OALP के तहत बढ़ी डेडलाइन

सरकार ने Directorate General of Hydrocarbons की निगरानी में चल रही Open Acreage Licensing Policy (OALP) के दसवें और ग्यारहवें दौर की समयसीमा बढ़ाई है।

इससे पहले बोली जमा करने की अंतिम तारीख 29 मई तय की गई थी। हालांकि अब इसे बढ़ाकर 19 जून कर दिया गया है।

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विदेशी निवेश पर नजर

विश्लेषकों का मानना है कि लगातार डेडलाइन बढ़ाने के पीछे सरकार की कोशिश ज्यादा से ज्यादा विदेशी और घरेलू कंपनियों को आकर्षित करना है। अतिरिक्त समय मिलने से कंपनियां संभावित तेल-गैस भंडारों का बेहतर आकलन कर सकेंगी।

हालांकि लगातार पांचवीं बार समयसीमा बढ़ने को कुछ विशेषज्ञ नीतिगत अनिश्चितता और निवेशकों की हिचकिचाहट का संकेत भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि कई कंपनियां अभी भी भारतीय तेल-गैस क्षेत्रों की संभावनाओं और जोखिमों का आकलन कर रही हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है घरेलू तेल-गैस खोज?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना सरकार की ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा है।

सरकार चाहती है कि देश में नए तेल और गैस भंडारों की खोज हो ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके और वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित रहे।

Written By: Anushri Yadav

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