
Bhadohi Name Change: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के नाम को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को घोषणा की कि अब जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भदोही में आयोजित कारपेट एक्सपो के दौरान की।
मुख्यमंत्री के इस ऐलान के साथ ही जिले के नाम को लेकर चल रही लंबे समय की चर्चा फिर सामने आ गई है। इससे पहले भी भदोही का नाम संत रविदास नगर किया जा चुका है और बाद में इसमें भदोही नाम दोबारा जोड़ा गया था।
कारपेट एक्सपो के मंच से हुआ ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को भदोही पहुंचे थे। उन्होंने यहां 50वें इंटरनेशनल कारपेट एक्सपो का उद्घाटन किया और इसके बाद जनसभा को संबोधित किया।
इसी दौरान उन्होंने जिले के नाम को लेकर घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भदोही जिला ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब भदोही अंतरराष्ट्रीय कालीन कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। एक्सपो में देश के अलग-अलग हिस्सों से निर्यातक और विदेशी खरीदार पहुंचे हैं।
1,340 करोड़ की 112 परियोजनाओं की सौगात
नाम बदलने की घोषणा के साथ मुख्यमंत्री ने जिले के विकास से जुड़ी परियोजनाओं का भी लोकार्पण और शिलान्यास किया। जिले को 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई।
इनमें करीब 440.84 करोड़ रुपये की 65 परियोजनाओं का लोकार्पण और 899.27 करोड़ रुपये की 47 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
इन परियोजनाओं को भदोही, औराई और ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को भी हितलाभ प्रदान किया।
गंगा पर पुल से लेकर नए जेल तक की योजनाएं
विकास परियोजनाओं में ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्र में गंगा नदी पर प्रस्तावित पुल भी शामिल है। इस परियोजना की लागत करीब 320.51 करोड़ रुपये बताई गई है।
इसके अलावा मुंशीलाटपुर में करीब 209.18 करोड़ रुपये की लागत से 574 बंदियों की क्षमता वाले नए जेल के निर्माण का शिलान्यास किया गया। पुरानी तहसील परिसर में तैयार नए अतिथि गृह का लोकार्पण भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा।
भदोही के कालीन उद्योग को भी बढ़ावा
मुख्यमंत्री का दौरा केवल विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कारपेट एक्सपो में कालीन उद्योग से जुड़े कारोबारियों और निर्यातकों से भी बातचीत की।
भदोही में आयोजित चार दिवसीय कारपेट एक्सपो के गोल्डन जुबली संस्करण में बड़ी संख्या में निर्यातक और विदेशी खरीदार हिस्सा ले रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, एक्सपो में 223 निर्यातकों ने स्टॉल लगाए हैं और सैकड़ों विदेशी खरीदारों ने पंजीकरण कराया है।
मुख्यमंत्री ने भदोही के कालीन उद्योग की कारीगरी की सराहना की। उन्होंने वाराणसी, भदोही और मिर्जापुर को मिलाकर सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित करने की बात भी कही।
पहले भी बदला जा चुका है जिले का नाम
भदोही के नाम का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1994 में भदोही को अलग जिला बनाया गया था। इसके बाद 1997 में इसका नाम संत रविदास नगर किया गया था। 1999 में ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम किया गया और बाद में फिर भदोही नाम प्रचलन में आया।
अब मुख्यमंत्री की ताजा घोषणा के बाद एक बार फिर संत रविदास के नाम को जिले के आधिकारिक नाम से जोड़ने की प्रक्रिया सामने आई है।
नाम के साथ विकास पर भी सरकार का जोर
मुख्यमंत्री के भदोही दौरे में एक तरफ जिले की पहचान से जुड़ी घोषणा हुई, तो दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।
कालीन उद्योग, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय विकास को लेकर की गई घोषणाओं के बीच जिले के नए नाम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। अब आगे प्रशासनिक स्तर पर नाम परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।
written by Siddhi Srivastava



